महाभारत कालीन लाक्षागृह का द्योतक है लॉकडाउन– लाले बाबा

बांकेलाल निषाद

मिर्जापुर– स्थित परमहंस आश्रम में यथार्थ गीता के प्रणेता तत्वदर्शी महापुरुष स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्य लाले बाबा ने बताया कि कोरोना जैसे महामारी से बचने के लिये लाकडाउन महाभारत कालीन लाक्षागृह का द्योतक है ।उन्होंने बताया कि महाभारत का एक प्रसंग है कि विदुर जी को लगातार अपने गुप्तचरों से दुर्योधन के द्वारा किए जाने वाला षड्यंत्र और तैयारियों की सूचना बराबर मिल रही थी। लेकिन पांडवों को वार्णावर्त जाने से रोकना विदुर के बस में नहीं था। परंतु वह उनकी सुरक्षा तो कर ही सकते थे ।वह लगातार उनकी सुरक्षा के उपाय सोचते रहते थे। वार्णावर्त जाने के पहले पांडव माता कुंती सहित महात्मा विदुर को प्रणाम करने आए। महात्मा विदुर जी अवसर देखकर युधिष्ठिर जी से पूछा वह यदि जंगल में भीषण आग लग जाए तो जंगल के कौन से जानवर सुरक्षित रहेंगे। युधिष्ठिर ने उत्तर दिया जंगल में आग लगने पर स्वच्छंद और निर्भय घूमने वाले शेर, चीते, हाथी ,भालू और तेज भागने वाले हिरण आदि सारे जानवर जंगल की आग में जलकर राख हो जाएंगे ,। परंतु बिलों में रहने वाले चूहे सुरक्षित रहेंगे ।दावानल के शांत होने पर वह पुनः बिलों से बाहर निकलकर शांति पूर्वक और सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे। विदुर ने युधिष्ठिर के उत्तर से संतुष्ट हुए और बोले वत्स मैं तुम्हारे उत्तर से निश्चिंत हुआ और संतुष्ट हुआ। मेरी समस्त चिंताएं दूर हो गयी। जाओ सुरक्षित रहो यशस्वी भवः का आशीर्वाद देकर विदुर ने पांडवों को विदा किये। ठीक इसी प्रकार अंततः लाक्षागृह में दुर्योधन के मंत्री पुरोचन के लाक्षागृह षडयंत्र से महात्मा विदुर के युक्ति से पांडव माता कुंती समेत सुरंग के माध्यम से बच गये। लाले बाबा ने बताया कि ठीक इसी प्रकार कोरोनावायरस भी एक भयानक दावानल के समान है । इससे बचने का एकमात्र उपाय घर में रहना ही है। जो लगातार सारी सीमाएं लांघकर बाहर निकल रहे हैं ,घर में नहीं रह रहे हैं वे जल जाएंगे और जो लोग अपने घरों में रहेंगे वे सुरक्षित रहेंगे और भगवान का भजन भी कर सकेंगे। अपने धर्म शास्त्र यथार्थ गीता का अध्ययन भी कर सकेंगे ।भगवान की भगवत्ता को भी पा सकेंगे। इसलिए घर में बैठकर ही ओम का अहर्निश जप करें और परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद सदगुरु भगवान का ध्यान करें। कोरोना जैसी महामारी से बच सकेंगे।

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