पलायन से सरकार की खुलेगी पोल देश में खतरे की घंटी

बांकेलाल निषाद

चीन -के वुहान शहर से अबाध गति से संक्रमित करता हुआ कोरोना पूरी दुनिया में अभी तक अजेय अस्त्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। दुनिया की महाशक्तियों में शुमार कोरोना किसी अदृश्य शक्ति की तरह खेल- खेल में चीन ,अमेरिका, इंग्लैंड, इटली उत्तरी कोरिया, बेलारूस ,भारत जैसे सैकड़ों देश में भय और आतंक का माहौल बना चुका है। कोरोना जब चीन में तबाही मचा रहा था तो पूरा विश्व यह तमाशा देख रहा था कि चीन को उसके करनी का फल मिल रहा है। कोरोना के आसन्न खतरे से पूरा विश्व शाहे बेखबर था। यह सोच रहा था कि यह केवल चाइना तक ही सीमित रहेगा ।ऐसी सोच में भारत भी शामिल था ।जब दुनिया के कुछेक दूरदृष्टि रखने वाले देश चीन से आने वाली हवाई जहाजों को लैंडिंग होने के पहले ही वापस कर देते थे तो उस समय हमारे देश के प्रधानमंत्री चीन, इंग्लैंड ,अमेरिका जैसे दर्जनों देश में हवाई जहाज भेजकर अपने देश के नागरिक को वापस अपने देश में पलायन करवा रहे थे ।उनको वहीं पर हवाई अड्डों पर लॉक डाउन के बजाय उन्हें अपने घर सुरक्षित भेज रहे थे ।इन्हीं पलायनवादियों के संक्रमण से हमारा पूरा देश भी कोरोना से संक्रमित हो चुका है। और मोदी सरकार के इस गलत निर्णय का विरोध कोई भी विपक्ष समय रहते नहीं किया। हमारे देश के हाईप्रोफाइल अय्याश परस्त लोग विदेश से लाकर कोरोना का गिफ्ट हमारे देश के करोड़ों गरीब, मजनून, भोली -भाली जनता को दे चुके हैं। सरकार समय रहते यह नहीं चेत पायी कि जब इटली ,अमेरिका, ब्रिटेन ,चीन जैसे देश कोरोना तूफान को नहीं रोक पाए तो हमें पलायन नहीं कराना चाहिए था। फर्स्ट स्टेज पर हाई प्रोफाइल लोगों का पलायन सरकार नहीं रोक पाई जिसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है ।दूसरे स्टेज पर गांव देहात से शहरों में कमाने जाने वाली गरीब जनता का पलायन सरकार यदि समय रहते नहीं रोक पायी तो इसका खामियाजा बहुत ही भयानक होगा ।अभी तक हाईटेक शहर में ही केवल इसका प्रकोप है जब यह प्रकोप गांव देहात में पहुंचेगा तो पूरा महामारी का रूप ले लेगा। तब पूरा गांव का गांव साफ हो जाएगा। चारों तरफ लाशों का मंजर दिखाई देगा।। स्वास्थ्य रैकिंग में पूरे विश्व में भारत का 112 में स्थान है यहां पर 4000 मरीज पर एक डॉक्टर है और वहीं पर इटली में 4000 मरीज पर 9 डॉक्टर हैं। हमारे देश के 135 करोड़ जनता में 1लाख बीस हजार वेंटिलेटर हैं ।पूरे देश में अस्पताल बहुत कम बने हैं इसी वजह से सरकार 30 हजार ट्रेन की बोगियों को आइसोलेट सेंटर बनाने की तैयारी में हैं । स्वास्थ सुविधा के अभाव के साथ-साथ यहां का सिस्टम भी खराब है ।एक उदाहरण से यहां के सिस्टम की कमियों को हम देख सकते हैं मशहूर गायक कनिका कपूर जब हवाई अड्डों पर कोरोना से पॉजिटिव पायी गयी तो इसके बावजूद भी वह सिस्टम को रौंदते हुए लगभग हजारों की संख्या में प्रोग्राम के माध्यम से लोगों के संपर्क में आ चुकी थी ।तब जाकर कहीं केंद्र और राज्य की सरकारें उसे आइसोलेट की ।ठीक इसी तरह से कई चूक सरकार द्वारा हुआ होगा। जिससे हमारे देश की जनता अनभिज्ञ है। देश प्रेम की भावना से सेवा करते हुए चीन में कोरोना का खुलासा करने वाले डॉक्टर ली की मौत हो चुकी है। इटली में दो दाम्पत्य डॉक्टरों की भी मौत अपने देश के नागरिकों की सेवा करते हो चुकी है। हमारे देश में जब 4 हजार मरीज पर एक डॉक्टर इन मरीजों का देखरेख करेगा तो किस भावना से करेगा वह भगवान ही जाने। इस महामारी से निपटने के लिए हमारे देश में अभी भी सरकार और विपक्ष पलायन रोकने में शाहे बेखबर हैं ।पलायन रोकने के लिए सरकार के ऊपर विपक्ष को बराबर दबाव बनाने के बजाय सहयोग करने की जरूरत है। सरकार विपक्ष एक मंच पर खड़े होकर बॉर्डर पर टेंट लगवा कर पलायन कर्ताओं के लिए वहीं पर खाने-पीने की व्यवस्था करने की सख्त आवश्यकता है । डॉक्टरों की टीम रखकर उसी टेंट को आइसोलेट सेंटर बना दिया जाए जिससे लॉक डाउन का पूरी तरीके से पालन हो सके । 135 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत के पास मात्र कोरोना से बचने का एक ही उपाय है लाक डाउन ।बचाव ही सुरक्षा की 101 परसेंट गारंटी है। इसके अलावा और कोई बचने का विकल्प नहीं है। जिस देश की सरकार भविष्य में आसन्न खतरे को देखते हुए अपने देश में उद्योग, अस्पताल ,भुखमरी, बेकारी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा , टेक्नोलॉजी रक्षा आदि पर काम की हो वहां पर ऐसे महामारियो से बचने का उपाय हो सकता है ।लेकिन हमारे देश की सरकार और विपक्ष इन मुद्दों पर काम ही नहीं की है। इनको केवल भावनात्मक मुद्दे चाहिए जिसको भड़का कर दीर्घकाल तक वे मात्र सत्ता में बने रहें। उनका लक्ष्य मात्र सत्ता में बने रहना और सत्ता सुख लेते रहना है। इटली का प्रधानमंत्री अपने देश की जनता की मौत पर रो रहा था लेकिन हमारे देश के नेताओं के आंख में ऐसी कई गुना भयानक मौत आएगी तब भी इनकी आंख में आंसू नहीं आएगा। ये अपने देश की जनता से मन से जुड़े हैं दिल से नहीं। जब मात्र एक-दो करोड़ पलायन वादियों के लिए भोजन टेंट आदि की नहीं व्यवस्था कर पा रहे हैं तो जब कोरोना अपने सातवें चरण में होगा तब उसकी क्या व्यवस्था कर पाएंगे। हमारी देश की हर एक नागरिक को चाहिए जो जहां है वही रहकर लाक डाउन का हंड्रेड परसेंट पालन करें । देश के नागरिकों को ख़ुद बचे और लोगों को बचाए इसी सिद्धांत पर काम करने की जरूरत है।

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