लाकडाउन से देवताओं में हड़कंप सभी पहुंचे पृथ्वी लोक

बांकेलाल निषाद

मोदी -की 21 दिन लॉक डाउन से मंदिर ,मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे में ताला लटकने से देवताओं को भोग न लगने से भूखे प्यासे सभी धर्मों के देवतागण त्राहिमाम त्राहिमाम करते हुए महर्षि नारद जी के पास पहुंचे। नारद जी को देवताओं को देखते ही पूरी बात समझने में देर न लगी और वे सभी को लेकर ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। ब्रह्माजी देखते ही नारद जी से कहे कि मेरा तो कहीं मंदिर है नहीं राजस्थान को छोड़कर ।मैं केवल एक ही मंदिर के कारण सदा ही भूखा रहता हूं मैने जब आज तक अपना हल नहीं निकाल पाया तो आप लोगों का हल कैसे निकालूगा। चलो सीधे महादेव के पास वही कोई हल बतायेंगे। सभी पहुंचे महादेव के पास, नारायण- नारायण की ध्वनि सुनते ही महादेव नारद पर भड़क गए कि मूर्ख 1 मीटर की दूरी बनाए रखना, सैनिटाइजर और मास्क का प्रयोग किया नहीं ऊपर चढ़ा चला आ रहा है ।और सुनो सैकड़ों वर्षों उपवास बाद मेरे नंदी बैलों के वंशजों का योगी मोदी के नाते का पेट भर रहा है सभी सांढ़ खुलेआम खा पी रहे हैं मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं जाऊंगा। चलो सभी लोग क्षीरसागर। महादेव भी चल दिए साथ में, क्षीरसागर पहुंचते ही सभी देवतागणों में भगवान विष्णु ने पहली बार गुरु नानक, ईसा मसीह और हजरत को देखा ।अंतर्यामी बिष्णु आने का कारण सब जान गये। प्रश्नवत भाव से पूछ पड़े ,महापुरुषों आपका आगमन ? हजरत ने कहा प्रभु पृथ्वी लोक में एक मोदी नाम का प्रधानमंत्री है उसके लाक डाउन को देखकर विश्व के सभी देश के प्रधानमंत्री ने सभी धर्म स्थलों में ताला लगवा दिया है जिससे 33 करोड़ देवतागणों के साथ हमें भी आना पड़ा । मुस्कुराते हुए भगवान विष्णु ने उत्तर देते हुए कहा कि हजरत मोदी को आप लोग आज झेल रहे हैं मैं इसके नोटबंदी जीएसटी से ही झेल रहा हूं । माता लक्ष्मी पृथ्वी लोक से पलायन कर इनके पास चरण दबाने के अलावा और कोई सेवा नहीं बचा है ।इसका हल अयोध्या के रामलला पृथ्वी लोक से ही निकलेगा। विष्णु समेत महादेव, ब्रह्मा सभी लोग अयोध्या में रामलला के पास पहुंचे। रामलला से नारद के हल पूछते रामलला बिगड़ गये, कि सैकड़ों वर्षों से मैं अंबेडकर के संविधान की मार झेलते मेरी अधिकतर उम्र टेंट मे बीत गया, किसी तरह आंधी तूफान झेलते मेरे चेले योगी मुझे टेंट से छत में किया, और मैं उसके खिलाफ कुछ नहीं बोलूंगा नहीं तो मूझे फिर बाहर कर देगा। हां इसका हल इस समय, समय के महापुरुष स्वामी अड़गड़ानंद से निकल सकता है । रामलाल समेत सभी देवतागंण मिर्जापुर स्थिति शक्तिशगढ़ आश्रम पहुंचे तो पता चला कि स्वामी जी पालघर मुंबई आश्रम पर है। सभी देवतागण लाकडाउन का उल्लंघन करते पालघर आश्रम पहुंचे तो देखे कि स्वामी जी अपने शिष्यों को समुद्र के किनारे ब्रम्हविद्या का उपदेश कर रहे हैं। गुरु नानक उवाच, स्वामी जी आप पृथ्वीलोक के इस समय ,समय के महापुरुष हैं ,आपने मानव मात्र का धर्मशास्त्र यथार्थ गीता लिखा है हम देवतागणों के भोग निवरणार्थ कोई उपाय सुझायें। तत्पश्चात स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने सबको उचित स्थान देकर ससम्मान सबको बाल भोग करा कर मूछों पर ताव देते हुए बोले कि मैं सूरदास के वचनों का पालन कर रहा हूं।सभी देवतागण उत्सुकतावश पूछा कौन सा वचन स्वामी जी तो उन्होंने बताया कि सूरदास कह चुके हैं कि “संवत दो हजार के ऊपर ऐसा योग परे। पूरब, पश्चिम ,उत्तर ,दक्षिण चहुँदिश काल फिरे।। अकाल मृत्यु व्यापे जग माही प्रजा बहुत मरे ।काल व्याल से वही बचेगा जो हंस का ध्यान धरे ।।सूरदास हरि की यह लीला टारे नहीं टरे।। स्वामी जी ने बताया कि देवतागणों मैं खुद लॉक डाउन का पालन कर रहा हूं , शक्तेशगढ़ आश्रम भीड़ भाड़ वाली जगह छोड़कर मैं एकांत में पालघर आश्रम आ गया हूं ।कोरोना से इंसान अपनी औकात में है नहीं तो चारों तरफ एक देश दूसरे देश को, एक इंसान दूसरे इंसान को मिटाने में लगा हुआ था चारों तरफ ,श्मशान घाट पर मुर्दे हजारों की संख्या में जल रहे थे, पुलिस थानों में लड़ाई झगड़ा की वजह से भीड़ लगी रहती थी, रोड पर एक्सीडेंट हो रहा था ,धार्मिक स्थलों पर अनाधिकारियों की भरमार थी, कोर्ट में मुकदमेंबाजी की भरमार थी ।अब चारों तरफ शांति हैं।मोदी ठीक किया है सभी लोग ओम का जप करें अथवा दो ढाई अक्षर का कोई भी नाम जपें और अपने-अपने सद्गुरु भगवान का ध्यान करें। लॉक डाउन में 21 दिन यथार्थ गीता पढ़ें और देवता गणों आप लोगों से भी निवेदन है कि आप लोग भी लॉक डाउन का पालन करें। 21 दिन मत भोजन करिए ,उपवास रहिए हमारे सद्गुरु भगवान भी 21 दिन तक भोजन नहीं किये थे। इसी में कल्याण है। हां में सिर हिलाते हुए सभी देवतागण संतुष्ट हुए। सबको स्वामी जी ने स्वरचित यथार्थ गीता भेंट कर सबको अपने- अपने गंतव्य स्थान पर विदा किये।

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