सख्त लाकडाउन एवं इम्यूनिटी पावर दिलायेगी कोरोना से मुक्ति

बांकेलाल निषाद

अंबेडकरनगर -कोरोना (कोविड 19 ) महामारी वैश्विक रूप ले चुका है ।विश्व के दिग्गज देश अमेरिका ,ब्रिटेन ,फ्रांस, इटली, चीन, स्पेन जैसे सैकड़ों देश कोरोना के सामने घुटने टेक चुके हैं ।भारत भी इससे अछूता नहीं है। कोरोना से निपटने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा देश के 548 जिलों में 21 दिन का सख्ती से पालनार्थ लाक डाउन के लिए पैरामिलिट्री फोर्स लगा दी गयी है। कोरोना से लड़ने हेतु भारत सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के लिए एक्सट्रा धन एलॉट कर दिया है। देश के कुछेक शुभचिंतक सामाजिक कार्यकर्ता एवं उद्योगपतियों द्वारा प्रधानमंत्री राहत कोष में कोरोना से मजबूती से लड़ने के लिए खुद का धन यथासंभव भेज रहे हैं ।देश के मीडिया कर्मी, पुलिसकर्मी, स्वास्थ्य कर्मी,एवं देश के जवान युद्ध स्तर से इस महामारी से निपटने के लिए संघर्षरत हो चुके हैं ।लेकिन इन सबके बावजूद भी विश्व में क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से भारत का सातवां स्थान एवं जनसंख्या में विश्व का दूसरा देश 135 करोड़ जनसंख्या के साथ देश के हर नागरिकों को खुद सुरक्षित रखने के लिए ,अपने परिवार और देशवासियों को सुरक्षित के लिए सख्ती से लाक डाउन का पालन करने में सहयोग करने की सख्त जरूरत है। जिस तरीके से देश की हर सरकारी मिशनरियां हमारी सुरक्षा में मुस्तैदी से लगी है ठीक उसी मुस्तैदी से हमें भी इन सरकारी मिशनरियों का सहयोग कर लॉक डाउन का सख्ती से पालन करना चाहिए। क्योंकि सौभाग्य से भारत की जलवायु कोरोना से लड़ने के लिए हमारे पक्ष में है और हमारे देशवासियों की इम्यूनिटी पावर भी अन्य ठंडे देशों की अपेक्षा मजबूत है । एमआईटी की ताजा अध्ययन के मुताबिक जिस देश में मौसम अगर गर्म है और नमी भरा होगा तो इससे कोरोना वायरस के फैलने की आशंका बहुत कम हो जाएगी और जिन देशों में तापमान का पारा 3 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा और नमी 4 से 9 ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रही, तो वहां कोरोना वायरस के मामले 90 फीसदी पाए गए हैं। जबकि जिन देशों में पारा 18 डिग्री से ज्यादा रहा और नमी 9 ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से ज्यादा रही वहां पर ऐसे मामले 6 फीसदी ही सामने आए हैं ।इसलिए एमआईटी की रिपोर्ट हमारे पक्ष में है जहां पर अमेरिका, ब्रिटेन, चाइना, इटली आदि देशों का औसत तापमान 9 से 10 डिग्री है वहीं पर हमारे देश का औसत तापमान 28 डिग्री इसलिए ब्रिटेन अमेरिका ,स्पेन, चाइना आदि देशों में कोरोना कहर बरपा रहा है और वहीं हमारे देश में कोरोना कहर बरपाने के लिए अपने हिसाब से जलवायु नहीं पा रहा है इसलिए फेल हो रहा है। मई-जून में हमारे देश का तापमान कुछेक प्रदेश व जिलों को छोड़कर लगभग 40 से 50 डिग्री के बीच रहेगा। आईसीएमआर( इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च) के एक ताजा स्टडी में दावा किया गया है कि अगर हम सख्ती से घर में रहने का फार्मूला लाक डाउन का सफल हो जाए तो कोरोना जैसे वायरस को हम आसानी से हरा सकते हैं । विश्व पटल पर जहां पर जिस देश में तापमान गर्म है वहां पर मच्छर अधिक पाए जाते हैं और उस देश के नागरिक की इम्युनिटी पावर मलेरिया से लड़ते-लड़ते अपेक्षाकृत ठंडे देशों की इम्यूनिटी पावर से मजबूत हो जाती है ।इसी इम्यूनिटी पावर की मजबूती की वजह से कोरोना इन्फेक्शन के फैलने की संभावना कम रहती है और वहीं पर विश्व पटल के ठंडे प्रदेशों में जहां मच्छर बिल्कुल नहीं पाए जाते वहां पर वहां के नागरिकों की इम्यूनिटी पावर अपेक्षाकृत गर्म देशों के नागरिकों से अपेक्षाकृत कमजोर पाई जाती है। सौभाग्य से हमारे देश की जलवायु गर्म है यहां के नागरिकों की इम्यूनिटी पावर मजबूत है लेकिन इन सबके बावजूद प्रकृत तो हमारे साथ है ही लेकिन हमें सख्ती से खुद को लॉक डाउन का पालन करना पड़ेगा जिससे मानव से मानव में संक्रमण का खतरा ना उत्पन्न हो ।एक दूसरे से जब हम अपने आप को अलग कर लेंगे तो मानव से मानव में संक्रमण का खतरा बिल्कुल खत्म हो जाएगा। इसीलिये सरकार लाकडाउन के पालन हेतु पलायनकर्ताओं के लिए हर जनपद पर क्वॉरेंटाइन सेंटर जनपद मुख्यालय पर ही बना दिया है ।उनका बाकायदा चेकिंग होकर 14 दिन के बाद ही वह अपने घर लौटेंगे और जो लोग अपने घर लौट चुके हैं वह स्वतंत्र पूर्वक सड़क पर न घूमें। सख्ती से लाक डाउन का पालन करें। इसी में भलाई है ।

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