तबलीगी मरकज एक बार फिर देश के सिस्टम पर उठाता सवाल

बांकेलाल निषाद

करीब 200 किलो आरडीएक्स युक्त कार से घटित पुलवामा हमला , एअरपोर्ट पर कनिका कपूर के कोरोना पॉजिटिव के बावजूद सैकड़ों लोगों से संपर्क के बाद आइसोलेट , दिल्ली दंगे में ताहिर हुसैन के घर में पेट्रोल बम आदि का पूर्व नियोजित पहुंचना और वैश्विक महामारी का रूप ले चुका कोरोना मौत के सौदागर में मौलाना एम और मौलाना साद के माध्यम से पूरे देश को मौत के मुख में धकेलना जैसे मामले एक बार फिर देश के सिस्टम पर सवाल उठाने लगे हैं कि आखिर पुलवामा हमले में दो सौ किलो आरडीएक्स से लैस कार कैसे जवानों की गाड़ी में टकराई, यह उस समय आईबी एलआईयू ,सीबीआई, रा की नाकामी का द्योतक है ।उस समय पूरे देश के सभी खुफिया एजेंसियों पर सवाल उठने लगे थे। ठीक इसी तरीके से दिल्ली दंगों में निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर में कैसे पेट्रोल बम आदि आया? इस समय कोरोना वैश्विक रूप ले चुका है, पूरा विश्व अलर्ट है, लेकिन भारत का सिस्टम इस समय आखिर क्यों अपंग हो चुका है। इसके बाद मौलाना एम जो खुद कोरोना पॉजिटिव के बावजूद भी सैकड़ों लोगों को संक्रमित करता हुआ 26 मार्च को मौत को गले लगा लिया। इसके बावजूद भी हमारे देश का सिस्टम सोता रहा । 4 मार्च को मौलाना साद के नेतृत्व में करीब दो हजार देश विदेश के तबलीगी मरकज में शामिल हुए जिसमें हमारे देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ कम से कम 15 देशों के मौलाना यहां आए हुए थे जिसमें इंग्लैंड से 3 ,श्रीलंका से 34 ,नेपाल से 19 ,क्रिगिस्तान से 28 ,बांग्लादेश से 19 ,सिंगापुर से 1, कुबैत से एक, अल्जीरिया से एक ,फिजी से चार आदि लोग शामिल होकर कोरोना आत्मघाती बम को धर्म की दुहाई देकर पूरे देश में विस्फोट का प्लान बना रहे थे। दिल्ली के निजामुद्दीन पुर में इस तबलीगी मरकज में मौलाना साद के नेतृत्व में करीब दो हजार लोग इकट्ठे होकर दिल्ली सरकार , केंद्र सरकार और साथ-साथ एलआईयू, आरबीआई , रा सीबीआई ,सभी को ठेंगा दिखाते हुए अपने मकसद में कामयाब हो रहे थे। 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी का लॉक डाउन पूरे देश में लागू हुआ। धारा 144 लागू हुई। कहीं भी दो-चार लोग इकट्ठे ना हो सके लेकिन यहां 2000 लोग इकट्ठे थे । इनको तब तक नहीं पता चला जब तक कि उसमें से एक बुजुर्ग निकल कर अपनी जांच के दौरान कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला । इसमें जांच के दौरान 441 को करोना लक्षण पाया गया करीब 20 की संख्या में लोग मर गए ,तमिलनाडु में 57 कोरोना पॉजिटिव में 50 इसी तबलीगी मरकज के लोग थे। तब जाकर दिल्ली सरकार और पूरा सिस्टम जागा और देश के सभी मस्जिदों में छापा पड़ने लगा ।आगरा स्थित एक मस्जिद से 87 विदेशी मिले, लखनऊ अमीनाबाद में छापे के दौरान मस्जिद के अंदर 6 लोग पकड़े गए , रबूपुरा 17 लोग छिपकर रह रहे थे जिसमें सभी कोरोना संदिग्ध पाये गये। आगरा एक मस्जिद में 87 लोग पकड़े गए ।दिल्ली की राज्य और केंद्र की सरकार समय रहते नहीं चेती। जिसकी वजह से बहुत तेजी से कोरोना धीरे-धीरे थर्ड स्टेज को पारकर बहुत अधिक लोगों को संक्रमित करने की तैयारी में है। हमारे देश की सरकार और सिस्टम तब जागती है जब घटना घटित हो जाती है । घटना के पहले कुंभकरण नींद में सोती रहती है । जो इस समय इटली में हाहाकार मचा हुआ है यह वहां के सिस्टम की खराबी की वजह से ही हाहाकार मचा है। जैसा आज हमारा देश कर रहा है। इटली में शुरू से ही पूरा सिस्टम सरकार और नागरिक वहां से कोरोना को मजाक के रूप में लिए और आज भुगत रहे हैं । कोरोना जब शुरुआत में पैर पसार रहा था तो उस समय इटली सरकार लोंबारडी में फुटबॉल का मैच करा रही थी उसमें 40000 की भीड़ थी इसी प्रोग्राम के बाद से इटली में कोरोना का कोहराम मचा। लेकिन हमारा देश कनिका कपूर मौलाना यम ,मौलाना साद के माध्यम से सैकड़ों लोगों को कोरोना संक्रमित कर चुका है अब दिल्ली की सरकार केजरीवाल पर आरोप लगा रही है और केजरीवाल दिल्ली सरकार पर ,जबकि इसके लिए सरकार और सिस्टम दोनों दोषी हैं ।हमारी सरकार और सिस्टम कोई भी कानून लागू करती है तो केवल अधिकतर गरीबों पर ही टाइट रहता है ।आए दिन पुलिस गरीबों पर लाठियां तो चलाती दिखाई देती है लेकिन अमीरों पर नहीं।और पूरा सिस्टम देश का गरीबों पर तो शिकंजा कसता है लेकिन मौलाना साद ,मौलाना यम और कनिका कपूर के ऊपर न लाठी बरसती है और ना ही सिस्टम का शिकंजा करता है ।मौलाना साद के ऊपर तो एफ आई आर धारा 269, 270 ,271,और 1208 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है फिर वह मुकदमा लड़ेगा छूट जाएगा ।उसकी वजह से तब तक लाखो लोग काल के मुंह में समा जाएंगे। कुछ दिनों तक राजनेता हाहाकार मचाएंगे ।सब मामला शांत हो जाएगा ।वोट बैंक की राजनीति करने वाली हमारी सरकार पक्ष और विपक्ष इन धर्म के ठेकेदारों पर नकेल कसने के लिए क्यों डरतीहै? जिस तरीके से राम और रहीम ,रामपाल दर्जनों धर्म के ठेकेदार जेल के सलाखों के अंदर हैं आखिर इन मौलानाओं पर जो आईएसआई के इशारे से आत्मघाती कोरोना बम बना कर पूरे देश में हाहाकार मचाना चाहते थे पूरे देश में मौत का तांडव मचाना चाहते थे। इनको आखिर तत्काल जेल की सलाखों के अंदर क्यों नहीं कर दिया जाता ।आखिर इन्हें टीवी चैनलों पर फिल्मी स्टाइल से क्यों पेश किया जाता है ।आखिर मस्जिद जब आस्था का केंद्र के बजाय समाज और देश के लिए घातक का केंद्र बना है तो इन पर स्थाई तौर पर क्यों नहीं ताला लटका दिया जाता। इनको हैंडल करने वालों को जेल के सलाखों मे क्यों नहीं रखा जाता है ?।उनके साथ नरमी क्यों बरती जा रही है ? कम से कम 15 देशों से विदेशी नागरिक कैसे एयरपोर्ट से बिना चेक किए 280 की संख्या में जमे हुए थे?। आखिर इन मौलानाओं को जो आईएसआई के इशारे पर पूरे देश में आत्मघाती कोरोना बम बना कर पूरे देश के 135 करोड़ की जनता को मौत का मंजर बनाने पर आखिर केंद्र और राज्य की सरकारें और हमारे देश का सिस्टम क्यों मौन है? जैसे गरीबों पर जिस कानून और सिस्टम के बल पर लाठियां बरसती हैं उसी सिस्टम और कानून से इन मौलानाओं और साजिशकर्ताओं पर लाठियां क्यों नहीं बसती?

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