कोरोना हब की ओर बढ़ता भारत

बांकेलाल निषाद

पूरे विश्व में हाहाकार मचा चुका कोरोना चीनियों की चमगादड़ से निकला या यह खुद चीन का जैविक हथियार है यह रहस्य अभी भी बना हुआ है । जब से जनवरी से कोरोना विश्व पटल पर चीन से अस्तित्व में आया तभी से पूरी दुनिया कोरोना को हल्के में लिया और इसके प्रति लापरवाही बरती गयी। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य स्वास्थ्य संगठन भी इस पर बराबर चीन के पक्ष में ही पर्दा डालता रहा। अंततः विश्व स्वास्थ्य संगठन के कर्मी जब इसकी चपेट में खुद आ गये, उनके माध्यम से विकसित देशों में भी फैलना शुरू हुआ तब इसके प्रति जब तक सचेत होते तब तक कोरोना इनको पूरी तरह अपने गिरफ्त में ले चुका था। और धीरे-धीरे चीन उत्तर कोरिया ,अमेरिका ,इटली, स्पेन ,इंग्लैंड ,भारत जैसे सैकड़ों देश में अपना कहर बरपाना चालू किया ।अमेरिका, इंग्लैंड ,स्पेन आदि देशवासियों की जनसंख्या लगभग पांच- पांच,-छह- छह करोड़ की हैं और यह पूरी तरीके से विकसित देश है। इतनी कम जनसंख्या में इतना तेज संक्रमण इन देशों का कोरोना के प्रति लापरवाही का ही परिणाम है। हमारा देश भी इन लापरवाह देशों से कम नहीं है। हमारा देश भी समय रहते नहीं चेता और शुरुआत में दो-तीन पेशेंट एक हफ्ते में भारत में बढ़ते थे और अब इन्हीं लापरवाही के कारण प्रतिदिन कोरोना पाजिटिव की संख्या सैकड़ों में बढ़ रही है। सिस्टम में खराबी ,तबलीगी जमात, धारावी और गांव देहात में क्वॉरेंटाइन सेंटर में बरती जाने वाली शिथिलता के कारण भारत कोरोना हब बनने की ओर संकेत कर रहा है। भारत की आत्मा गांव में बसती है । देश में 135 करोड़ जनसंख्या में अधिकतर जनसंख्या गांव में निवास करती हैं। यहां अधिकतर गरीब और मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं। मोदी जी के लॉक डाउनलोड के बाद बॉर्डर पर इकट्ठा हुए समस्त शहरों में गए हुए मजदूरों मे जब अफरा-तफरी मची मजदूर या तो पैदल या तो ट्रक या अन्य किसी माध्यम से गांव की तरफ लाखों की संख्या में कूच कर गए ।आनन-फानन में गांव के ही प्राइमरी स्कूल को क्वॉरेंटाइन सेंटर बना दिया गया। यहां गांव के मजदूरों की स्थिति यह है कि ये स्कूली बच्चों की तरह केवल भोजन के समय ही इकट्ठा होते हैं। बाकी मनमानी इधर-उधर घूमते हैं ।इन पर कोई नकेल नहीं है ।यदि कोरोना हाइटेक सिटी और हाई प्रोफाइल लोगों के माध्यम से मजदूरों में संक्रमित हुआ होगा तो देश में प्रधानमंत्री के मन की बात ,थाली/ ताली और दीये कोरोना हब बनने में रोक नहीं पाएगी। वहीं पर तबलीगी जमात निजामुद्दीनपुर में जब हजारों की संख्या में मस्जिद में इकट्ठे हुए थे तो पूरी मस्जिद को ही प्रशासन को क्वॉरेंटाइन सेंटर बना देना चाहिए था। उसको वहां से खाली नहीं कराना चाहिए था। समय से उनका इलाज हो जाता। और वहां से पूरे देश में आज न तो संक्रमित होने का खतरा बनता और ना ही उनकी धड़पकड़ प्रशासन के सर का बोझ बनता । आज तबलीगी जमात के हजारों की संख्या में पूरे देश में मानव के माध्यम से मानव में संक्रमण फैला कर पूरे देश के लिए आफत कर दिए हैं ।वहीं दूसरी तरफ धारावी मुंबई एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी इलाका है ।यहां लाखों की संख्या में मजदूर ,मजबूर, हाईटेक के लोग रहते हैं। 15 लाखों की आबादी वाले स्लम के लोग जब तंग गलियों में कितना भी लोग बचाकर जाएं लेकिन तब भी कंधे से कंधा रगड़ ही जाता है। इनको संभालने में प्रशासन को लोहे के चने चबाने पड़ जाते हैं ।लेकिन सबसे देश के लिए नेगेटिव बात यह है कि यहां पर भी कोरोना पॉजिटिव पेशेंट मिलने लगे हैं। यह देश के लिए बहुत बड़ी खतरे की घंटी है। हमारे देश में बहुत देर तक विदेशी लोग आते रहे ,जाते रहे यहां की एंबेसी वीजा देने में तनिक भी हिचक नहीं दिखायी। हमारा प्रशासन ऑन रोड सोशल डिस्टेंस में तो 70% कामयाब तो हो गया है लेकिन गांव देहात में बिल्कुल फेल नजर होता दिखाई दे रहा है। इन सब खतरों के बावजूद भी हमारे देश के प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर, टीवी चैनल पर मन की बात करते हैं। इनकी बात सोशल डिस्टेंस कोरोना से निपटने की उनकी तैयारी ,सिस्टम को कैसे चुस्त-दुरुस्त करें, देश को कैसे इसके प्रति जागरूक किया जाए, इन सब पर बात नहीं करते वे अभी भी पोगा पंथियों, पाखंडियों की तरह कोरोना से निपटने के लिए कहीं थाली बजवाते हैं कहीं ताली बजवाते हैं तो कहीं दीये जलवाते हैं । हालांकि इनके पास ये सब करने का अभी समय भी है क्योंकि अभी देश में 3000 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अभी अमेरिका ,इटली, स्पेन, ब्रिटेन, चाइना की अपेक्षा यहां ताली थाली और दीपक जलवाने का समय है ।धारावी तबलीगी जमात गांव के प्राइमरी स्कूल क्वॉरेंटाइन सेंटर में बरती गई शिथिलता के बाद जब कोरोना पूरे देश को अपने आगोश में ले चुका होगा तो यहां पर प्राचीन काल से ही सजी सजाई जातीय भेदभाव, उन्मादी संप्रदायवाद व अन्य वाद के कारण सब हाथ पर हाथ रखकर तमाशबीन बने बैठे रहेंगे। कोई किसी का मदद करने के लिए तैयार नहीं होगा। हमारे देश में कितनी दुर्भाग्य की बात है कि जब विश्व के विकसित देश अपने विज्ञान के चमत्कार से कोरोना को नहीं रोक पाए हैं तो ज्योतिषियों ने अपनी बाजार चमकाने के लिए टीवी चैनलों पर ज्योतिष के माध्यम से कोरोना ठीक करने का उपाय सुझा रहे हैं और सरकार इन पर नकेल नहीं कस पा रही है।

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