न छोड़ें उम्मीदों का दामन, लाक डाउन का करें पालन–स्वामी अड़गड़ानंद

बांकेलाल निषाद

स्वामी अड़गड़ानंद ने कहा गरीबों और असहाय की यथाशक्ति करें मदद
मानव मात्र का एकमात्र धर्म शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता तत्वदर्शी महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने भक्तों को भेजे संदेश में कहा कि घर पर ही रहे उम्मीदों का दामन न छोड़े और लॉक डाउन का सख्ती से पालन करें। अध्यात्म से जुड़े और यथार्थ गीता का पाठ करें और गरीब असहाय की यथाशक्ति मदद करें। वर्तमान में स्वामी जी आध्यात्मिक प्रवास पर महाराष्ट्र के पालघर आश्रम में हैं। आश्रम से ही उन्होंने देशभर में फैले अपने भक्तों को संदेश प्रेषित किया ।स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहा कि हम उस परमात्मा की रचना है जो पूरे ब्रह्मांड का नियंता है। हम उसके बच्चे हैं वह सब कुछ अपने बच्चों के लिए करता है ।हमारी कमी ,कमजोरी, बीमारी ,दुख, अशांति और मान अपमान कहीं न कहीं हमारे कर्मों से जुड़े होते हैं ।जन्म जन्मांतर में जो हमने किया उसे भुगतना ही पड़ता है। परंतु ईश्वर एक ऐसा मौका देता है जब हम अपने भाग्य को उसके सानिध्य में लिख सकते हैं ।यही वह अवसर है जब परमात्मा का स्मरण करें घर पर रहकर अध्यात्म से जुड़े और धर्मशास्त्र यथार्थ गीता का प्रतिदिन पाठ करें। उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है। ऐसे हालात में भारत सरकार अपने देशवासियों की सुरक्षा के लिए योजनाबद्ध तरीके से हर संभव प्रयास कर रही है। देशवासियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह सरकार का सहयोग करें और पूरी तरह पालन करें उनका दामन न छोड़ें। संकट के बादल अवश्य छटेंगे । साथ ही स्वामी जी ने भक्तों को कहा कि वह जहां भी हैं वहीं से यथा सामर्थ गरीब एवं असहाय लोगों की मदद करें। जरूरतमंदों में अन्न दान करें ।ध्यान रहे कि अन्नदान से बड़ा कोई दान नहीं होता और मानव सेवा ही सर्वोपरि है ।इसके साथ ही स्वामी जी ने कहा कि भारत सरकार यथार्थ गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करें और इसे स्कूल ,कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल कराएं इससे समाज में व्याप्त तमाम भ्रांतियां और कुरीतियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी ।साथ ही धर्म एवं जात-पात के झगड़े खत्म हो जाएंगे।

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