मानवता की नई परिभाषा लिखता एक अनजान चेहरा

अतुल श्रीवास्तव

उन्नाव -जंहा एक तरफ कोरोना के डर से लगभग आबादी घरों में कैद हो गयी है।वंही पर कुछ ऐसे अंजान लोग भी समाज में उभर कर बाहर आये हैं,जो अपनी जिंदगी को जोखिम में डाल कर दूसरों की जिंदगी बचाने में जुटे हैं।”कोई आदमी भूखा न सोये”इस कथन को चरितार्थ करने का भरसक प्रयास कर रहे हैं और निःस्वार्थ ऐसे काम को कर रहे हैं जिससे उन लोग की जिंदगी चल रही है जो इस लॉक डाउन में भुखमरी के कगार पर आ गये थे।
इन्ही अंजान चेहरों में एक चेहरा हैं सुनील कुमार का,ये पेशे से एक व्यापारी हैं शुभी प्लाईबोर्ड और हार्डवेअर के नाम से अचलजगंज में अपनी एक दुकान चलाते हैं।
इन्होंने अपने साथियों के साथ मिल कर समाज के समक्ष एक ऐसी मिशाल पेश की है जिसे लोग अपने जीवन भर नही भुला सकते।जँहा एक तरफ लोग अपनी जिंदगी को बचाने के लिये घरों में कैद हो गये हैं वंही पर इस व्यक्ति ने अपना जीवन संकट में डाल कर एक ऐसी मुहीम की सुरूवात की आज कई जिंदगी इस मुहीम से भूख और प्यास से बच गई।इन्होंने लोगों को भूख से बचाने के लिये ख़ुद का किचन तैयार किया जिसमें रोजाना कम से कम पांच सौ लोगों को भोजन वितरण किया जाता है।
जब हमारी टीम उनके पास पहुंची और इस बारे में जानकारी ली किस दिन से और कितने दिन आप का ये वितरण कार्यक्रम चलेगा तो उनका जवाब सुन कर हम अचंभित हो गये।
उन्होंने कहा कि जिस से लॉक डाउन शुरू हुवा है उस दिन से ये कार्यक्रम शुरू हुवा है और जब तक एक लॉक डाउन चलेगा तब तक हमारा ये कार्यक्रम चलता रहेगा।
जब उनसे पूछा गया कि इस सहयोग के पीछे आप का मुख्य उद्देश्य कंही कोई राजनीति में अपना एक नया चेहरा चमकाने तो नही है तो उनका बस एक ही जवाब है कि हम सिर्फ जरूरत मन्दो की मदद कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं और इन सबसे हमको एक नई ऊर्जा प्राप्त होती है।
इस सहयोग में मुख्यरूप से कुछ ऐसे चेहरे भी इनके साथ जुड़ कर इनकी इस मुहीम में इनकी मदद कर रहे हैं जो सिर्फ मानव धर्म और मानव जाति के पक्षधर हैं।
इसमें मुख्य रूप से राहुल अवस्थी, राजकिशोर, प्रशांत तथा अमित यादव आदि अपने मानव धर्म का पालन इनके साथ- साथ कर रहे हैं और जरूरत मंदों की मदद कर रहे हैं।

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