न्याय की आवाज पर मुकदमा तो इन बैंक कोटे पर क्यों नहीं कोटा बना दुधारू गाय, कानून के हंटर का नहीं है भय

अंबेडकरनगर ब्यूरो — बांकेलाल निषाद

जनपद अंबेडकरनगर -में कोटे के खिलाफ उठने वाली आवाज पर अंबेडकरनगर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज तो कर दिया जाता है । उनकी आवाज दबा दी जाती है ।इन आवाजों का बस इतना कसूर रहता है बस वही पुरानी राग कि कोटेदार घटतौली करता हैं ,कोटेदार पैसा ज्यादा लेता है, कोटेदार तैश में आकर बात करता है ,कोटेदार गाली गलौज फौजदारी आमदा हो जाता है, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देता है। इन कार्ड धारकों का यही पुरानी घिसीपिटी शिकायत रहती है। इस समय करोना वैश्विक महामारी से आम जनमानस को कोई समस्या न हो इसके लिए केंद्र और राज्य की सरकारें अतिरिक्त राशन मुहैया कराई है और उनके खाते में पैसा डाल दी है। लेकिन ये कोटेदार उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से गरीब जरूरतमंदों के हक पर डाका डालने पर लगे हुए हैं। जब कार्ड धारक गरीब जरूरतमंद इस डकैती का विरोध करता है तो उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसकी सदा के लिए आवाज बंद कर दी जाती है। और धन कुबेर के बल पर पूर्ति निरीक्षक आदि की मिलीभगत से कार्ड धारक इनका बाल बांका नहीं कर पाता उल्टे इस आवाज के खिलाफ ही मुकदमा हो जाता है ।इसका जीता जागता उदाहरण अभी हाल ही में विधायक प्रतिनिधि समेत दो लोगों पर कोटा के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मुकदमा दर्ज हो गया और दूसरी उदाहरण रुस्तमपुर ग्राम सभा के कोटेदार राजकिशोर यादव ऑब्जर्वर कुलदीप तिवारी की उपस्थिति में प्रति यूनिट 1 किलो राशन कम दे रहा था जिसकी आवाज उठाने के लिए उग्र ग्रामीणों ने लगभग 200 की संख्या में इकट्ठे हुए तो उनमें से 22 के ऊपर मुकदमा दर्ज हो गया। न्याय की आवाज उठाने वाले 22 लोगों पर तो मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन कोटेदार का बाल बांका तक नहीं हुआ ।जब अंबेडकर नगर की पुलिस इन आवाज उठाने वालों के ऊपर मास्क न लगाने , लाक डाउन का उल्लंघन करने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने, के जुर्म में मुकदमा दर्ज कर सकती है तो आखिर बैंक के सामने इकट्ठे भीड़ के मुंख पर न तो मास्क लगा रहता है, न सोशल डिस्टेंस रहता है और न ही लाक डाउन का पालन होता है। आखिर इन बैंक कर्मियों ,कोटेदारों एवं इनके सामने भीड़ के ऊपर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मुकदमा क्यों नहीं दर्ज होता। एक तरफ शासन-प्रशासन लाक डाउन का सख्ती से पालन करने के लिए 24 घंटे सक्रिय हैं तो दूसरी तरफ किसी भी बैंक के सामने या किसी भी कोटेदार के घर के सामने कोई भी अदना व्यक्ति शासन या प्रशासन का चला जाए तो वहां लाक डाउन , सोशल डिस्टेंसिंग ,मास्क का प्रयोग का कितना पालन होता है हकीकत सामने आ जाएगी । आखिर कोरोना संक्रमण का खतरा क्या कोटेदार की दुकान और बैंक के सामने से होकर नहीं फैल सकता। शासन प्रशासन को चाहिए जिस तरीके से हाईवे पर, चौराहे पर बैरिकेटिंग करके लाक डाउन का सख्ती से पालन कराया जाता है तो ठीक इसी तरीके से उतनी ही सख्ती से पुलिसकर्मियों का एक उड़नदस्ता टीम गठित कर इन बैंक कर्मियों एवं कोटेदारों के सामने सोशल डिस्टेंसिंग लाक डाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल एफ आई आर दर्ज कर उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करें ।जिससे जमीनी हकीकत पर भी लाक डाउन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके ।यदि हाईवे और चौराहे से गुजरते हुए व्यक्ति से कोरोना फैल सकता है और लाक डाउन सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन में उसके ऊपर लाठी बरस सकती है तो इन बैंक कर्मियों के सामने और कोटेदारों के दुकान के सामने की भीड़ से भी कोरोना संक्रमण फैल सकता है ।कानून का चाबुक जब चले तो पीठ की पहचान न करके चले ।बराबर सब पर चले।

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