पालघर की दुखद घटना से स्तब्ध हूंस्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज

बांकेलाल निषाद

मानव मात्र का एकमात्र धर्म शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने पालघर में हुए संतों की निर्मम हत्या से काफी मर्माहत हैं । महाराष्ट्र में जूना अखाड़े के दो साधुओं सहित तीन लोगों की निर्मम हत्या कांड की स्वामी अड़गड़ानंद महाराज जी ने निंदा की। उन्होंने कहा कि मैं इस दुखद घटना से बहुत दुखी और स्तब्ध हूं । मेरी संवेदनाएं जूना अखाड़े के साथ हैं। ऐसा कुकृत्य करने वालों को सरकार कड़ी से कड़ी सजा दे ताकि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसा समाज जो संत महात्माओं और अन्य लोगों में फर्क न समझे और उस पर जानलेवा हमला करें ऐसे समाज और ऐसी भीड़ की मैं निंदा करता हूं ।उन्होंने बताया कि जूना अखाड़े के महात्मा को पीट-पीटकर हत्या करना यह ऐसे भीड़ और समाज के लिए कलंक है और ऐसे भीड़ और समाज को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि दोबारा ऐसी गलती न हो । ज्ञातव्य हो कि परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज इस समय पालघर आश्रम में विराजमान है। उन्होंने एकमात्र परमात्मा का भजन करने ,अपने सद्गुरु का ध्यान करने, ओम का जप करने और संत महात्माओं की सेवा करने पर बल देते हैं। और समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ धर्म के नाम पर पाखंड, कर्मकांड के खिलाफ आवाज उठाते रहते हैं ।ऐसे में पालघर जूना अखाड़ा के दो साधुओं सहित तीन लोगों की निर्मम हत्या से काफी वे क्षुब्ध हैं मर्माहत और आहत हैं। उन्होंने यह मांग की कि उनकी हत्या करने वाले एक-एक व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाना चाहिए। उनको कड़ी से कड़ी सजा देना चाहिए ताकि पुनः भीड़ और समाज ऐसी घटना से बचें।

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