सुपरपावर की होड़ में कोरोना विलेन ड्रैगन की चाल !

बांकेलाल निषाद

चीन के वुहान शहर में जब कोरोना ने पहली बार दस्तक दी तो उस समय कोरोना के भूकंपीय धमक से पूरी दुनिया शायद यह एहसास नहीं कर पा रही थी कि एक ना एक दिन इसका कोपभाजन उसे खुद कोरोना बना लेगा । 21वीं सदी की पीढियों को यह शायद आभास नहीं था कि भविष्य में पूरी दुनिया को कोरोना अपनी जद में ले लेगा लेकिन सुपर पावर बनने की होड़ में चीनी चाल ने अपने जैविक हथियार कोरोना का इस्तेमाल कर पूरी दुनिया की आंखों में धूल झोंक कर इसे प्रकृति प्रदत्त (चमगादड़) को कारण ठहराया ।लेकिन जैसे-जैसे कोरोना चीन के वुहान शहर से जंप कर बीजिंग और शंघाई को छोड़ते हुए हजारों मील दूर पूरे विश्व में अपने पांव पसारने शुरू किये और अचानक भूत की तरह बुहान शहर कोरोना से छूमंतर हो गया । तब दुनिया यह कयास लगाने लगी कि आखिर कोरोना चीन की बीजिंग शंघाई जैसे शहर को छोड़कर हजारों मील दूर न्यूयॉर्क, इटली, रोम ,बर्लिन, नई दिल्ली, इंग्लैंड में कैसे फैला। कोरोना का कहर इस तरह बरपा कि इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और रूस के प्रधानमंत्री मिखाईल मिशुसि्तन भी कोरोना से नहीं बच पाये ,।इसी कोरोना ने सुपर पावर का ताज अमेरिका से छीनने की फिराक में है, जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री ने अपने देश की गिरती अर्थव्यवस्था से चिंतित होकर अपने आप को रेल के हवाले कर दिये,। इटली की दुनिया के नंबर दो की स्वास्थ्य व्यवस्था कोरोना ने ऐसा रौंदा कि उसकी चूल्हे हील गयी । या यूं कहें कि कोरोना के साम्राज्य में कोई देश सुरक्षित नहीं है यहां तक दुनिया मोदी और ट्रंप की जोड़ी का एक साथ गर्जना भी सुनने को बेताब है ।मोदी ट्रंप दोनों के चेहरे का स्वभाविक मुस्कान को कोरोना ने राहु और केतु की तरह ग्रस लिया है। दुनिया के सड़कों पर समयानुसार बच्चों को स्कूल आना और जाना ,ऑफीसरों की अफसरई का मंद पड़ जाना , जल थल और वायु वाहनों का ठिठक जाना, यकायक पर्यटक स्थलों पर सैलानियों का अकाल, सीमा पर गोली बारूद की बौछारें का बंद होना, आसमान में युद्धक लड़ाकू विमानों की चीखों का अचानक चुप हो जाना यह सब ड्रैगन का कारनामा है।इस त्रासदी ,खूनी खेल का खिलाड़ी मानवता का हत्यारा ,मौत का सौदागर ,ड्रैगन चीन की देन है । चीन के सुपर पावर बनने का सपना आज दुनिया को श्मशान घाट में तब्दील कर दिया है ।चीन के वुहान लैब में बना कोविड नाइनटीन वायरस चीन का जैविक हथियार है जिसे उसने बड़ी चालाकी से पूरी दुनिया को वायरल कर आज अपनी मूछों पर ताव दे रहा है ।इसमें उसका पूरा सहयोग डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस ने सहयोग कर चीन का एहसान उतार रहे हैं ।उसके इस चालाकी पर बराबर डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डाक्टर टेड्रोस पर्दा डालते रहें क्योंकि टेडो्स पर चीन का बहुत बड़ा एहसान था और अमेरिका सहित पूरी दुनिया का कोप भाजन बनने के लिए डब्ल्यूएचओ ने बराबर चीनी ढाल का काम करता रहा । जबकि ताइवान ने बराबर डब्ल्यूएचओ को यह आगाह करता रहा कि यह चीनी वायरस मानव से मानव में संक्रमण करने वाला वायरस है। इस पर समय रहते तत्काल कदम उठाया जाए लेकिन डब्ल्यूएचओ ने ताइवान के इस चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए बराबर चीनी चाल का समर्थन करता रहा ।जब कोरोना बुहान शहर से डायरेक्ट अमेरिका में तबाही मचाना शुरू किया तो हजारों की संख्या में लाशों को देख तिलमिलाए ट्रंप ने चीनी वायरस का नाम दिया तो इतने में चीन को मिर्ची लगनी शुरू हो गया। उसने पलटवार अमेरिका को ही इसका दोषी ठहराने लगा। बुहाना लैब से निर्मित यह कोरोना वायरस चीनी चाल का ही परिणाम है जिसका सबसे प्रामाणिक तथ्य जापान के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर डॉक्टर टासुकू होंजों कोरोना के बारे में यह दावे के साथ बताया कि यह पूरी तरीके से चीनी लैब में बना हुआ है ।उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक नहीं ।उन्होंने बताया कि यदि यह प्राकृतिक होता तो चीन जैसे ठंडे देशों में स्विट्ज़रलैंड आदि में कोरोना कहर बरपाता और गर्म देश में यह खत्म हो जाता लेकिन इसका संक्रमण जितनी तेजी से ठंडे देशों में चीन और स्विट्जरलैंड आदि में विनाशकारी है उतना ही गर्म देशों में भी विनाशकारी बना हुआ है। उन्होंने बताया कि वे 4 साल चीन के मुंह लैब में काम कर चुके हैं और सारे मेंबर से उनकी बराबर बातचीत होती थी लेकिन कोरोना के बाद लगातार तीन महीने तक इन लैब टेक्नीशियनों के मोबाइल से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसका मतलब कि कोरोना से सारे लैब टेक्नीशियन मर चुके हैं। उन्होंने यहां तक दावा किया कि यदि मेरी बात झूठी निकली तो मेरा नोबेल पुरस्कार वापस ले लिया जाए ।सुपर पावर बनने की होड़ चीनी चाल ने शुरुआत में कोरोना संकट को नकारने और कुप्रबंधन से सामाजिक अव्यवस्था और आक्रोश पैदा न हो ऐसे में जिनफिंग ने बड़े पैमाने पर आक्रामक तरीके से घरेलू और ग्लोबल प्रोपेगंडा कैंपेन शुरू किया। इस जरिए से चीन के कोरोना को लेकर अपनी सख्त अप्रोच को छिपाने वैश्विक रूप फैलाने में अपनी भूमिका को छिपाने और खासकर अमेरिका आदि के खिलाफ अपनी एक अच्छी छवि गढनी शुरू कर दी। और बाद में चीनी भूमिका के कंफर्मेशन के बावजूद 2020 में चीन की पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन की तारीफ करता रहा जबकि उस समय तक सारे सबूत चीन के इस प्रतिबद्धता को गलत साबित कर रहे थे। कोरोना से बुहान शहर जैसे ही मुक्त हुआ उसने मिसाइल का परीक्षण करना शुरू कर दिया और दक्षिणी चीन सागर में चीन ने अपने विस्तार वादी नीति के तहत पैर पसारना शुरू कर दिया ।और जब चाइना में कोरोना के शुरुआती दौर था तो उस समय विश्व के सभी बाजारों से चीन ने n95 मास्क, मेडिकल प्रोटेक्टिव सूट, गॉगल्स कीटाणु नाशक सर्जिकल, ग्लव्स ऑक्सीजन मशीन और मेडिकल वेंटिलेटर को दान के बहाने या पैसा देकर खरीद लिया । यह सभी चीजें कोरोना के मरीजों के इलाज और डाक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ के लिए बेहद जरूरी है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी महीने में किलर कोरोना वायरस के संक्रमण बढ़ने पर चीन के अधिकारियों ने विश्व भर के बाजारों से अरबों मास्क और सैकड़ों टन मेडिकल उपकरण खरीद कर विश्व बाजार को खाली कर दिए । जैसे ही विश्व में कोरोना अपना पैर फैलाना शुरू किया तो इन मेडिकल उपकरणों से बाजार खाली देखते हुए उसी उपकरणों को पूरे दुनिया के बाजारों में ड्रैगन ने चौगुने दाम पर सप्लाई करना शुरू कर दिया और इस सप्लाई से अकूत धन कमा कर अपनी जीडीपी बढ़ाकर सुपर पावर बनने के स्वप्न को साकार करने लगा। ड्रैगन की चाल ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दिया है ।लाखों की संख्या में बिछी लाशें श्मशान घाट बन चुके पूरी दुनिया ,सुपर पावर बनने की चीनी चाल के खिलाफ पूरी दुनिया को एक होकर इसके मंसूबे पर पानी फेरने की सख्त जरूरत है। हालांकि अमेरिका ने ब्रिटेन फ्रांस इटली स्पेन आदि यूरोपीय देशों को अपने पक्ष में करके मानवता के हत्यारे ड्रैगन को जवाब देने के लिए पूर्ण रूप से तैयारी में है। ड्रैगन पर वैश्विक आर्थिक पाबंदी लगाकर और उस पर हमला करके उसको सबक सिखाने की सख्त जरूरत है। इसको संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थाई सदस्यता से निकाल कर इसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए इसके लिए आयात और निर्यात की नीतियों में बदलाव कर इसको व्यापार से अलग कर दिया जाए। जिससे वह दोबारा कोरोना जैसे जैविक हथियार का इस्तेमाल करने लायक ना रह जाए।

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