शराब ने दिखाया अपना रंग* अगर जरूरी है तो पीना बहुत जरूरी

अखिलेश श्रीवास्तव

जीना अगर जरूरी है तो पीना बहुत जरूरी है

लखनऊ -कोविड 19 को लेकर जिस तरीके से आज पूरे विश्व में हाहाकार मचा है लोग जीवन जीने के लिये संघर्ष कर रहे हैं।हर व्यक्ति की यही पहली सोच है कि किस तरीके हम अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करें ताकि हम इस महामारी में भुखमरी से बच जाएँ।चारो तरफ भय का माहौल है।लोग एक दूसरे के सम्पर्क में आने से बच रहे हैं।सिर्फ दूर संचार प्रणाली ही सम्पर्क का एक जरिया बना है।कई ऐसे लोग हैं जो महीनों से अपने परिवार से नही मिलें सिर्फ इस लिये की उनका परिवार इस महामारी सलामत रहे।
आज की घटना से ऐसा प्रतीत होता है मानो ये सब एक फरेब, एक दिखावा है,बन्द आँखों से दिख रहा एक सपना सा प्रतीत होता है।
हम बात कर रहे हैं शराब की जो आज महीनों बाद लोगों के बीच में आयी।
भारत सरकार की गाइड लाइन के अनुसार प्रत्येक राज्य के उन शहरों में शराब की दुकान खुलेंगी जो ऑरेंज और ग्रीन जोन में आते हैं और इस शर्त पर कि वह क्षेत्र हॉट स्पॉट न होना चाहिए।और जब ये दुकाने खुलेंगी तो वहाँ पर मौजूद लोगों को बाकायदा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा।
आप ने लाइन में लगे देश को बहुत बार देखा, कभी नोट बन्दी के समय,कभी खाद्य सामग्री प्राप्त करने के लिये।
लेकिन आज एक लाइन ऐसी भी लगी जो सोचने को मजबूर कर गयी।
आज जो कुछ हुवा उसे देख ऐसा लग रहा था मानो कोरोना को खत्म करने की दवा मिल रही हो लोग सुबह से ही लाइन बना कर शराब जैसे अमृत को पाने के लिये आतुर दिखे।जैसे -जैसे समय बढ़ता गया भीड़ बढ़ती गई। ऐसा प्रतीत होने लगा की लोग अब लोग कोरोना से जंग जीत गये हैं और शराब के पैग के साथ ही इस जीत का इजहार करेंगे।
लोगों की ऐसी भीड़ उमड़ी की मानो कोरोना हमारे बीच से बहुत दूर जा चुका है।
न कोई मास्क न कोई ग्लब्स न कोई सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न अपनी चिंता न परिवार की चिंता बस लक्ष्य सिर्फ उस बोतल तक पहुंचना था जिसके लिये सुबह से लाइन में लग कर जंग लड़ रहे थे।
अब बात आती है कि क्या कोरोना से जंग जीतने के लिये जो लॉक डाउन अभी तक लगाया गया है उस पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ेगा?
अगर वास्तविक रूप में देखा जाये तो ये आज की भीड़ भी उस कोरोना कैरियर का काम कर सकती है जिससे भारत वर्तमान समय में जूझ रहा है।
जिस जोखिम से आज लोग इक्कठा हुए उससे तो ये बात स्पष्ट हो गया कि अभी ये जंग दूर तक जायेगी और न जाने कितने अंजान शख्स इनके चपेट में आकर अपने जीवन को कोरोना नामक बीमारी को भेंट कर चुके होंगे।
बात सोचने कि ये है आज से कुछ दिन पहले भारत वर्ष में अधिकतम लोग ऐसे थे जिनको खाने के लाले थे।लेकिन आज जैसे ही मदिरा सेवन की बारी आई लोग झोला भर-भर के शराब को अपने घरों में पहुंचाने लगे।
मानो पूरी जिंदगी सिर्फ शराब के सहारे जीने का मन बना लिया।
जान है तो जहान है यह नारा बेबुनियाद दिखता प्रतीत हुवा।
दो गज दूरी जैसे नारे को आज लोगों ने मदिरा की चाह में पूरी तरीके से निष्फल सिद्ध किया।
बस आज यदि कोई नई चीज देखने को मिली तो सिर्फ यही कि लोग आज भी जीवन बचाने को भूल कर उस मदिरा के प्रति नतमस्तक हो गये जो अपराध का एक कारण भी है।

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