कोरोना नियमावली शादी को यदि समाज अंगीकार करें तो कोई मां-बाप बेटी को बोझ न समझे।

बांकेलाल निषाद

कोरोना का चला हंटर बंदिशों में शादी संपन्न

अंबेडकरनगर -जिधर देखता हूं उधर तू ही तू है। न तेरी खुशबू और न तेरी बू है।। ,जी हां यह पहले विज्ञान पर सटीक बैठती थी लेकिन अब यह लाइन कोविड 19 कोरोना के कहर पर सटीक बैठती है। वैश्विक महामारी का रूप ले चुका कोरोना इंसान ही नहीं बल्कि जीव जंतु को भी अपने हिसाब से जीने के लिए बाध्य कर दिया है। आज जनपद अंबेडकरनगर के आलापुर तहसील अंतर्गत खरुवाव ग्राम सभा के सूर्यमणि दुबे पुत्र रामजीत दुबे की बारात जब दूल्हा समेत उसके मामा एवं भाई, पंडित आदि को मिलाकर 10 बाराती जनपद आजमगढ़ थाना अतरौलिया राम ध्यान शुक्ला की पुत्री बीनू की शादी के लिए उनके घर पहुंचे तो ऐसा लगा मानो रिश्तेदारी करने आए हो। गाजा, बाजा ,डीजे ,नाच आर्केस्ट्रा आदि जलसा की चीज़ों का स्थान सैनिटाइजर ,मास्क, गल्वश, सोशल डिस्टेंसिंग आदि ने ले ली थी। पूरे बाराती घराती मिलाकर मुश्किल से 15 लोग रहे होंगे । घरातियों द्वारा स्वागत में पान खिलाने के बजाय मास्क का वितरण किया जा रहा था,बारातियों के स्वागत समारोह में हाथ मिलाने के वजाय सैनिटाइजर पकड़ाया जा रहा था, जहां डीजे पर धुन आज मेरे यार की शादी है बजता था वहां लोगों का उपदेश चल रहा था कि सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें जहां बरात पहुंचते ही ,हम आए हैं बाराती बारात लेके वहां 10-5 लेके और ले जाएंगे दुल्हन को अपने साथ लेके बल्कि यहां दुल्हन को ही छोड़ गये दुल्हन की विदाई सोमवार को होगी। , जहां पूरे बारातियों पर सेंट और परफ्यूम्स का छिड़काव किया जा रहा था वहां इस बारात में दिखा कि सेंट परफ्यूम की जगह पूरे शरीर को ही सैनिटाइज किया जा रहा था, जहां पंडित जी शादी कराते वक्त जोर-जोर से माइक में मंत्रोच्चारण करते थे वहां मुंख पर मास्क लगाए मंत्रोच्चारण कर रहे थे और उनकी ध्वनि उनके मुंह में ही 80 परसेंट दब जा रही थी बाहर नहीं निकल पा रही थी। दुल्हन- दूल्हे एक दूसरे को वरमाला पहनाते वक्त जहां मुस्कुराकर कैमरे के सामने फोटो खिंचवाते थे वहीं पर दोनों मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए फोटो खिंचवाने से बच रहे थे कि कहीं कोरोना कानून का हंटर हम पर न चल जाए नहीं तो यहीं से जिंदगी की प्रथम दहलीज पर ही मुकदमा से जिंदगी सुखमय के बजाय दुखमय जीवन जीने के लिए हम मजबूर हो जायेंगे। जहां दोनों समधी गले मिलकर ठहाका लगाकर हंसते थे आज वहीं समधी हाथ जोड़कर कम से कम 2 मीटर दुरी पर खड़े होकर हाल-चाल पूछ रहे थे। सालिया जहां मजाक मजाक में दूल्हे का गाल नोच लिया करती थी वहीं बेचारी कोरोना के डर से खींझकर झुंझलाहट के साथ 1 मीटर की दूरी से फूल नोच- नोच कर दूल्हा और दुल्हन के ऊपर फेंक रही थी। कोरोना का कहर इतना ही नहीं वर पक्ष की तरफ से दहेज में मिला सामान को पिकअप से नहीं ले जाया गया बल्कि उसे वर पक्ष के लोग मोटरसाइकिल पर लादकर बाद में ले जायेंगे। कैमरामैन ,समधी, दूल्हा और दुल्हन बराती और घराती कुल मिलाकर 15 लोग शादी कराते वक्त ऐसा चौकन्ना थे कि मानो किसी के घर में डकैती डाल रहे हों। ऐसी शादी हुई कि एक पड़ोसी भी नहीं जान पाया होगा। 10:00 बजे रात्रि में बारात गई और 3:00 बजे भोर में ही बिदाई हो गयी। मात्र 2 फोर व्हीलर गयी और चली आई ।जहां शादियों में दर्जनों गाड़ियां और सैकड़ों बाराती मिलाकर दोनों वर और कन्या पक्ष से कम से कम 10 लाख खर्च होता था वहीं इस शादी में दोनों वर और कन्या पक्ष से मुश्किल से एक लाख खर्च हुआ होगा ।जो भी हो कोरोना की वजह से बहुत से गरीब हो या अमीर परिवार हो इस दौरान शादियां कर्ज मुक्त हो रही हैं ।काश कोरोना शादी वाली नियमावली यदि पूरा जनमानस अंगीकार कर लेता तो सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ में चार चांद लग जाता। दहेज प्रथा में किसी भी बेटी की हत्या होने से समाज बच जाता और हर मां-बाप अपनी बेटी को बोझ न समझता।

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