जहांगीरगंज थाने का मामला डॉक्टर और बैंककर्मी के इज्जत पर लगा बाट , कानून के रखवाले दागदार।

मनोज कुमार तिवारी

सादे वर्दी में हल्का सिपाहियों द्वारा, इज्ज़त पर डकैती, क्षेत्र में दहशत।

जनपद अंबेडकरनगर- में जहां चारों तरफ पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी एवं अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार मिश्र के दिशा -निर्देशन में सख्त लाक डाउन का पालन कराने में पूरे जिले के पुलिस कर्मियों पर फूल -माला, पुष्प -वर्षा ,अंग -वस्त्र आदि भेंट कर आम जनमानस द्वारा स्वागत किया जा रहा है तो वहीं पर दूसरी तरफ जहांगीरगंज थाना अंतर्गत बंगालपुर भूपेश समेत दो हल्का सिपाहियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि पुलिस वर्दी दागदार हो गयी है । इन हल्का सिपाहियों का पूरा प्रकरण यह है है कि 3 मई को शाम लगभग 7:00 बजे एक बैंक कर्मी बाजार सामान लेने जा रहा था। बंगाल पुर खिद्दिरपुर पोखरे की झाल में बैठे सादी वर्दी में भूपेश समेत दो सिपाही अचानक बैंक कर्मी पर टूट पड़े और उसकी मोटरसाइकिल को रोक लिये।उसकी चाबी निकालकर डिग्गी चेक करने लगे। बैंक कर्मी को लगा कि डकैत हमारी जान मार देंगे उसने तत्काल फोन गांव में किया और कम से कम बीस पच्चीस की संख्या में लोग वहां पहुंचे और जैसे ही भीड़ उग्र हुई तब तक उन्होंने अपना आइडेंटी कार्ड दिखाया और बताया कि मैं जहांगीरगंज थाने का हल्का सिपाही हूं । दोनों सिपाही तत्काल वहां से भाग निकले। फिर यही सिपाही 3 लोग 8 मई को शाम 7 बजे लगभग फरीदपुर श्याम करन सिंह के मशीन के बगल झाल में छुप कर बैठे थे और बगल में अपनी पल्सर गाड़ी जिसका नंबर यूपी 15 एवी 3968 है को दूर खड़ी किए थे। इतने में डॉक्टर राम पलट मरीज देखने जा रहे थे। तुरंत फिल्मी स्टाइल से झाल से निकल कर उसमें से एक सिपाही डॉक्टर.के गाड़ी की चाबी निकालकर डिग्गी तुरंत खोलने लगे ।डॉक्टर ने बताया कि मेरे होश उड़ गए कि मेरी जिंदगी में आज तक मेरी गाड़ी की चोरी नहीं हुई है और लग रहा है गाड़ी तो चोरी होगी ही और मेरी जान भी चला जाएगी। जब डिग्गी में कुछ नहीं मिला तो फिर सिपाही वही 3 मई की तर्ज पर डॉक्टर से माफी मांग कर वापस थाने चले गये। जब पड़ताल किया गया तो पता चला कि ये लोग डिग्गी में कचिया दारू ढूंढते हैं। इनको क्षेत्र के सभी सम्मानित व्यक्ति दारू बेचने वाले दिखाई देते हैं और जब एक कचिया दारू वालों को पकड़ लेते हैं तो वहीं पर ही उससे मोटी मोटा रकम लेकर छोड़ देते हैं। थाने तक और थानाध्यक्ष तक मामला नहीं पहुंच पाता है और ये हल्के के सिपाही हर तीसरे चौथे दिन किसी न किसी संभ्रांत व्यक्ति को बेइज्जत कर देते हैं ।उसमें से अगर दारू वाला मिल जाता है तो मोटी- मोटा रकम इनको मिल जाती है और यह अपने ड्यूटी छोड़कर सादी वर्दी में थानाध्यक्ष को गुमराह करके इसी झाल में डकैतों की तरह छुपे रहते हैं। जैसे ही कोई मोटरसाइकिल आती है तुरंत उस पर डकैतों की तरह टूट पड़ते हैं। दारू वाले मिल गये तो उनसे पैसा लेकर छोड़ देते हैं। बाकी संभ्रांत व्यक्ति पकड़ में आ गए तो उनसे माफी मांग लेते हैं ।थानाध्यक्ष और क्षेत्राधिकारी को इन हल्के सिपाहियों के कारनामों का पता नहीं चल पाता ।इन सिपाहियों को अपने दायित्व का और अपने वर्दी का लाज नहीं है।इन्हें कानून का भी भय नहीं है। ये कानून के रखवाले नहीं बल्कि कानून के भक्षक हैं । ये पैसे में अंधे हो गए हैं। इनको पैसा चाहिए बाकी चाहे जो कर्म करना पड़े ।डकैतों और इनमें कोई अंतर नहीं है । ये जहां दारू बनता है उस भट्ठी पर नहीं जाते हैं बल्कि चोरों की तरह झाल में बैठे रहते हैं और उन दारू बेचने वालों की ताक में रहते हैं। संभ्रांत व्यक्तियों के मान सम्मान का इन्हें कोई गम नहीं है ।ऐसे सिपाहियों की लूट में छूट कब तक रहेगी ।प्रशासनिक कार्यवाही इनके खिलाफ कब होगी यह तो नहीं पता लेकिन क्षेत्र में इन सिपाहियों के खिलाफ दहशत का माहौल है और पूरा क्षेत्र आक्रोशित है। पुलिस अधीक्षक को समय रहते ऐसे सिपाहियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही कर इनको सबक सिखाने की सख्त जरूरत है। ताकि आइंदा ये किसी संभ्रांत व्यक्ति की इज्जत पर बांट न लगा सके।

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