पारिश्रमिक रोक बिजली कोरोना योद्धाओं के साथ हो रहा अन्याय पुष्प वर्षा के बजाय श्रमिक भूखों मरने पर मजबूर

बांकेलाल निषाद

पुष्प वर्षा के बजाय श्रमिक भूखों मरने पर मजबूर

अंबेडकरनगर-वर्तमान प्रधानमंत्री का चुनावी क्षेत्र वाराणसी मे ट्रान्सफार्मर मरम्मत कर्त्ता एजेंसियां पूरी तरह से करोना योद्धा की तरह मुस्तैद है और ट्रान्सफार्मर मरम्मत का कार्य कोरोना का परवाह किये बिना सरकारी नियमो का पालन करते हुये पूरी मुस्तैदी से कर रही है। विदित हो कि प्रदेश के हर जिले मे लगभग ट्रान्सफार्मर मरम्मत की कार्यशाला बिजली विभाग ने खोल रखी है और हर महीने औसतन 400-500 ट्रान्सफार्मर इन्ही कार्यशालाओं मे मरम्मत कराये जाते है ।कुशल कर्मियों के लिए अनुभवी एजेन्सीयो को मरम्मत के कार्य की जिम्मेदारी दी जाती है। अगर कोरोना के डर से मजदूर कार्य करने से इन्कार कर दे तो पूरे प्रदेश में अंधेरा छा जायेगा और खेती किसानी समेत सारे उधोग धंधे ठप हो सकते है । लेकिन मेडिकल कोरोना योद्धा की तरह ये एजेंसीया और उसके कुशल कारीगर कोरोना योद्धा की तरह काम कर रहें हैं लेकिन विडम्बना यह है कि मोदी जी योगी जी का चुनावी क्षेत्र होने के बावजूद इन कोरोना योद्धाओ की अनदेखी निगम प्रबन्धन वाराणासी द्वारा की जा रही है ।इन पर पुष्प वर्षा करने की बजाय इनका स्वागत सालो का पारिश्रमिक का भुगतान रोक कर किया जा रहा है । इसमें केवल निगम प्रबन्धन वाराणासी को दोषी बनाना पूर्णतया उचित नहीं होगा। इसकी जिम्मेदारी पूर्ण रूप से उत्तरप्रदेश पावर कारपोरेशन शक्ति भवन लखनऊ की है ।क्योंकि कि पूरे प्रदेश का सबसे बडा आफीसर (चेयरमैन)जो सारे डिस्कामो का सर्वेसर्वा है वह लखनऊ शक्तिभवन मे बैठता है । एक तरफ मध्यान्चल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड लखनऊ ने अपने ट्रान्सफार्मर मरम्मत कर्त्ता एजेंसीयो का पारिश्रमिक भुगतान अप्रैल 2020 तक करके अपने कोरोना योद्धाओ का सम्मान किया और वहीं दूसरी तरफ दूसरे डिस्काम पु० वि० वि ०नि ०लि ० वाराणसी के मरम्मत कर्त्ता एजेंसी का परिश्रमिक भुगतान अप्रैल 2019 के पहले से बाकी है ।यहाँ लगभग एक साल का पारिश्रमिक भुगतान अभी तक बाकी है । जबकि दोनों डिस्काम (पु० वि० वि ०नि ०लि ०वाराणसी)(म० वि० वि ०नि ०लि० लखनऊ) उ० प्र ०पावर कारपोरेशन शक्ति भवन लखनऊ के अधीनस्थ काम करते है। अब एक बात समझ मे नहीं आता कि जब दोनो डिस्काम शक्ति भवन लखनऊ के अधीनस्थ काम करता है तो ऐसा कैसे हो गया कि एक डिस्काम ने अप्रैल 2020 तक का पारिश्रमिक भुगतान करके अपने कोरोना योद्धाओ का स्वागत किया। जबकि दूसरी तरफ दूसरा डिस्काम अप्रैल 2019 से परिश्रमिक रोक कर कोरोना योद्धाओ का क्यो अपमान कर रहा है? । क्या शक्ति भवन लखनऊ प्रबंधन दोनो डिस्कामो को अलग-अलग नजरिये से देखता है? जबकि पु० वि० वि० नि० लि० वाराणसी देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री का चुनावी क्षेत्र भी है फिर इस तरह की लापरवाही इस डिस्काम मे कैसे हो रही है । सरकार की कई संस्थाये ऐसी भी है जो लघु उद्योग के बढावे के लिए काम करती है ।और 45 दिन मे भुगतान दिलवाने का काम करती है! ।क्या ये संस्थाये कुम्भकर्णी नींद मे सो रही है या शक्ति भवन लखनऊ प्रबंधन के साथ समझौता करके और एक सिंडीकेट बना काम कर रही है । क्योकि 45।दिन के अन्दर होने वाला भुगतान सालो तक नहीं हो रहा है तो इन पर संदेह करना लाजिमी है। एक तरफ मोदी सरकार गाँव, गरीब किसानों मजदूरों को कोरोना की इस वैश्विक महामारी मे आर्थिक मदद कर रही है वही दूसरी तरफ पावर कारपोरेशन शक्ति भवन लखनऊ कोरोना योद्धाओ के सालो का पारिश्रमिक रोक कर उनके अच्छे किये धरे पर बट्टा लगा रहा है । हाँ आखिरी मे एक बात कहना चाहूँगा पु० वि० वि० नि ०लि० वाराणसी देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री का चुनावी क्षेत्र होने के कारण यहाँ इतनी घोर लापरवाही होना जाँच का विषय है ।कही ये दोनों युग पुरूषो के चुनावी छेत्र को कमजोर करने की साजिश तो नहीँ ?

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