प्रशासन की लापरवाही से अंबेडकरनगर में कोरोना का बढ़ता ग्राफ परदेसी बाबू के टेस्टिंग में घोर लापरवाही, क्वॉरेंटाइन सेंटर बना महज खानापूर्ति

बांकेलाल निषाद

अंबेडकरनगर -कहावत है देर आए दुरुस्त आए अर्थात अंबेडकर नगर जनपद में पूरे प्रदेश में अन्य जनपदों की अपेक्षा कोरोना जहां बहुत देर से एंट्री मारी है वहीं प्रशासन की घोर लापरवाही से इसके फैलने की भयावहता नजर आने लगी है। देश के कोने-कोने से आये हुए मजदूरों के लिए टेस्टिंग के नाम पर जिले का स्वास्थ्य विभाग घोर लापरवाही बरत रहा है। दूरदराज से मजदूर जब अपने गांव या क्वॉरेंटाइन सेंटर पहुंच रहे हैं तो वहां से जब जिले पर वे टेस्टिंग के लिए जाते हैं तो लोहिया भवन और जिला हॉस्पिटल में हजारों की संख्या में मेला लग जाता है ।वहां पर कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं दिखता और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए कोई प्रशासन ही दिखता है। और न ही उनकी टेस्टिंग के लिए कोई डॉक्टर समय पर वहां पहुंचता है। इन टेस्टिंग सेंटरों पर यदि किसी भी मजदूर को कोरोना हो तो वह तत्काल हजारों मजदूरों को वहीं पर संक्रमित कर देगा और वे हजारों लोग पूरे जिले में अमेरिका के मीट फैक्ट्री और इटली के लॉन्बार्डी फुटबॉल खेल की तरह अंबेडकर नगर जनपद सहित कई जिले को अपने आगोश में ले लेगा। जिला प्रशासन को चाहिए की परदेसी बाबू को क्वॉरेंटाइन सेंटर में ही डॉक्टरों की टीम भेजकर वहीं इनकी टेस्टिंग करा कर इन्हें टेंशन मुक्त कर देना चाहिए । क्वॉरेंटाइन सेंटर से लेकर जिले तक परदेसी बाबू कितने लोगों के संपर्क में आते होंगे, न ये जानते हैं और न ही संपर्की ही जानता है। दूसरी तरफ परदेसी बाबू के क्वॉरेंटाइन सेंटर के नाम पर महज खानापूर्ति चल रही है। शासन के दिशा निर्देशानुसार परदेसी बाबू अपने घर में ही क्वॉरेंटाइन रहेंगे या नजदीकी प्राइमरी स्कूल या आंगनबाड़ी केंद्र पर । जो परदेसी अपने गांव पहुंचता है यदि कोई गांव का व्यक्ति संबंधित अधिकारी को इसकी सूचना देता है तो सूचना देने वाले ग्रामीण और परदेसी के बीच तनाव पैदा हो जाता है जिससे एक अलग समस्या मारपीट फौजदारी आमदा की हो जाती है और कितना भी वह घर पर बचाएगा लेकिन बच्चे और औरतों के माध्यम से पूरे गांव में कोरोना फैलने का भय बराबर बना रहता है। इन सभी मजदूरों परदेसियों को गांव के ही ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी ,आशा ,आंगनबाड़ी कार्यकत्री ,डाक्टरों की टीम की निगरानी में प्राइमरी स्कूल या आंगनवाड़ी केंद्र पर ही क्वॉरेंटाइन किया जाना चाहिए। और वहीं पर टेस्टिंग हो जानी चाहिए ।कहीं भी अनावश्यक भीड़भाड़ न लगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन हो । दूसरी तरफ पूरे जिले के आला अधिकारी का अधिकतर फोन बंद रहता है अथवा उठता ही नहीं है। एडीएम अंबेडकरनगर और जलालपुर एसडीएम का नंबर तो बिल्कुल नहीं उठता जिसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से भी हो चुकी है। लेकिन इनके ऊपर अभी तक कोई असर नहीं पड़ रहा है। एसडीएम जलालपुर के फोन न उठने की शिकायत किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष राम प्रकाश यादव और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रिका प्रसाद भी कर चुके हैं ।यदि कोई कोरोना संबंधित लेटेस्ट अपडेट लेना और देना हो तो मान के चलिए कि ये दोंनो पद जिले में है ही नहीं। सबसे बड़ी विडंबना जनपद वासियों की यह है कि पत्रकारों से कोरोना संबंधित डाटा छुपाया जा रहा है ।मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने फोन के माध्यम से पत्रकारों को बताया कि हमको कोरोना संबंधित लेटेस्ट अपडेट देने के लिए वीसी में मना कर दिया गया है । यदि ऐसे ही जिला प्रशासन कुंभकरण नींद में सोता रहा और एडीएम और एसडीएम जैसे जिम्मेदार अधिकारी का फोन नहीं उठा तो जल्द ही अंबेडकरनगर का ग्राफ पूरे प्रदेश में नंबर एक पर होगा। कोरोना को यहां फैलने की अच्छी जलवायु इन घोर प्रशासनिक लापरवाह अधिकारियों की वजह से मिल गया है। जल्द ही कोरोना कहर जनपद बहुत ही भयंकर झेलेगा।

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