बारहसिंघा/ हिरन की कालाबाजारी या नेचुरल डेथ ? वन्यजीवों के रक्षक हैं या भक्षक तेंदूआईकला के वन्य अधिकारी

बांकेलाल निषाद

जनपद अंबेडकरनगर- के तहसील आलापुर अंतर्गत तेंदूआईकला वन विभाग को ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले अपनी जान को जोखिम में डालकर पकड़कर एक बारहसिंघा और एक हिरन को सौंपा था इस उद्देश्य से कि ये वन अधिकारी तेंदुआईकला इन दोनों जीवों की रक्षा कर सकेंगे । लेकिन 10 दिन बाद ही पता चला की दोनों की मृत्यु हो गयी और वन विभाग के प्रांगण में ही दोनों को दफना दिया गया। डॉ मनोज कुमार यादव पशु चिकित्सा अधिकारी से पूछने पर पता चला कि ये जलवायु को सरवाइव नहीं कर पाए, डर भय के कारण इनको साक लगा और इनकी मृत्यु हो गयी। अरुण कुमार श्रीवास्तव रेंजर का दसों दिन से पता नहीं है कि वो कहां है। इनकी मौत क्यों हुई इसका कारण वे नहीं बता रहे हैं । चौकी प्रभारी सुतांशु का सीयूजी नंबर लगातार 20 दिन से बंद है ।वह भी हिरन और वारहसिंहा के मौत का कारण नहीं बता रहे हैं। हिरन और वारहसिंहा के दफनाने के वक्त उसका वीडियो इन लोगों के पास नहीं है यदि होगा भी तो ये अधिकारी देने से आनाकानी कर रहे हैं । एक हिरन और एक बारहसिंघा जिसकी रक्षा वन विभाग नहीं कर पा रहा है केंद्र और राज्य सरकार जीडीपी का कई परसेंट अकूत धन इन वन विभाग और इनके स्टॉप पर खर्च करती है इन्हीं वन्यजीवों की रक्षा के लिए । लेकिन इन वन्यजीवों के रक्षक नहीं बल्कि भक्षक हैं तेंदुआ ईकला वन विभाग । क्योंकि हिरन और वारहसिंहा का खाल, मांस, और सींग लाखों में बिकता है । कहीं इन हिरन और बारहसिंघा की कालाबाजारी तो नहीं हो गयी?। आखिरी अधिकारी जवाब देने से क्यों कतरा रहे हैं ।सलमान खान जैसी फिल्मी हस्तियां काले हिरण के शिकार करने के कारण जेल के सलाखों में जा सकते हैं तो ये वन विभाग के अधिकारी क्यों नहीं ?। इनके लापरवाही की वजह से इनकी मौत पर इन्हें क्यों नहीं सजा मिल रही है। इनके लिए भी कानून बना हुआ है। लेकिन इन्हें बचाया जा रहा है। इन अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने की सख्त जरूरत है ।नहीं तो ना जाने कितने वन्य जीव इन वन अधिकारियों की प्रशासनिक लापरवाही से या तो मौत को गले लगा लेंगे या तो इनके द्वारा अकूत धन के लालच में कालाबाजारी कर दिया जाएगा। आखिर जब यह वन्य जीवों की रक्षा नहीं कर पाएंगे तो इन्हें पुनः समाज या ग्रामीण भविष्य में भटके हुए वन्य जीवों को इन्हें सौंपने के लिए हजार बार सोचेगा कि कहीं हम इन वन्य जीवों को पकड़कर यमराज रुपी तेंदुआईकला बन विभाग को तो नहीं सौंप रहे हैं।

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