थानाध्यक्ष का तबादला विधायक की टेंशन ज्यों की त्यों विधायिका के घेराव के असर को बेअसर का प्रयास

बांकेलाल निषाद

अंबेडकरनगर -आसमान से गिरा खजूर पर अटका “कहावत को चरितार्थ कर रही है विधायक टांडा संजू देवी के थानाध्यक्ष का घेराव। बसखारी थाने का घेराव कर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह को तो विधायक संजू देवी ने हटवा दिया लेकिन उनके घेराव को बेअसर करते हुए भाजपा गुटबाजो ने उन्हीं की विधानसभा हंसवर थाने में थानाध्यक्ष को तैनात करवा दिये। जिससे विधायक की टेंशन ज्यों की त्यों बनी हुई है । पूरा प्रकरण यह है कि अभी चार दिन पहले टान्डा विधायिका के सब्र का बांध टूट जाने पर अपनी ही सरकार में बसखारी थानाध्यछ पर गंभीर आरोप लगा कर उन्हें हटाने की मांग की थी लेकिन दुर्भाग्य वश जिस सर्पदंश से वो मुक्ति चाह रही थी वही सर्प उनके गले मे डाल दिया गया अर्थात् उसी थानाध्यछ को उनकी ही विधानसभा के दूसरे थाने हंसवर मे भेज दिया गया । एक कहावत है साँप भी मर जाये लाठी भी न टूटे । पुलिस प्रशासन ने कुछ उनके साथ ऐसा ही मजाक किया जैसे एक कान को छोड दूसरा कान पकड लिया जाता है उसी तरह उस थानाध्यछ को उनके टान्डा विधानसभा के ही एक थाने बसखारी से हटा कर दूसरें थाने हंसवर में ट्रान्सफर कर दिया जाता है । लोकतंत्र मे जनता का शासन जनता के लिए होता है और जनता द्वारा ही विधायक और सांसद चुने जाते हैं । जब एक विधायक की संस्तुति किसी थानेदार को हटाने के लिए की गई तो इस हटाने की मुहिम पर कौन रोड़ा बन रहा जिसने सर्प को हटाने का बहाना बना उसे विधायक के गले मे डाल दिया। सवाल यह उठता है कि क्या अम्बेडकर नगर मे भाजपा का कोई बडा नेता टान्डा विधानसभा से अगले चुनावों में टिकट की दावेदारी मे शामिल होना चाहता है जो वर्तमान विधायिका को उनके छेत्र मे कमजोर करना चाहता है। अगर ऐसा नहीं टान्डा विधायिका के साथ जिले के शीर्ष नेता खडे क्यो नहीं नजर आये ?। कही अम्बेडकर भाजपा बाडी में दो गुट तो नहीं बन गये?। यह सोचने का विषय है । दूसरी तरफ एक बात और आती है कि जनता के द्वारा चुनी गई लोकप्रिय विधायिका के साथ पुलिस प्रशासन ने ऐसी हैरान मनमानी क्यो कर दी? जनता का शासन जनता के लिए है इस पर इतना कोरा मजाक क्यो किया ?सवाल यह उठता है कि किस अधिकारी एव नेता का यह दरोगा कमाऊ पूत है जो यह थानाध्यछ अपनी मर्ज़ी से ट्रान्सफर पोस्टिंग करवा कर जनता के शासन को धता बताता है। कितनी बेलगाम सरकार है ये जिसके बेलगाम अधिकारी इसी सरकार के जनप्रतिनिधियों की आवाज को मजाक बनाते हुये धता बता देते है। किस गुमान मे है योगी सरकार जो अपने कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियो का उपहास करवा रही है। अगर इसी तरह उपहास होता रहा और जनता का हाल राम भरोसे रहा तो आने वाले चुनाव में पार्टी का झंडा ढोने वाले कार्यकर्ता नही मिलेगे । केवल कागजो मे करोड़ों कार्यकर्ताओं की फौज मिलेगी अभी देर नहीं हुई है अगर योगी सरकार जनता के प्रति वास्तव मे ईमानदार है तो प्रदेश के सारे प्रमुख पोस्टो के बडे अधिकारी अपने बडे नेताओ से लेकर थानेदार कोटेदार टेन्डर से लेकर लेखपाल सिक्रटरी तक सीबीआई जांच करवा दे दूध का दूध पानी का पानी साफ हो जायेगा । कई नेता और अधिकारी सलाखों के पीछे होगे । राम राज्य लाना नहीं पडेगा खुद ब खुद आ जायेगा । इतिहास के पन्नों में आप का नाम स्वर्ण अच्छरो से लिखा जायेगा लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि जनता की सरकार को जनता के ठगने के लिए बनाया जाता है । जनता को ठगे जाने की आदत बन गयी है। नीले, हरे भगवा, पंजे, झाडू ,सबने अलग अलग रूप मे जनता को ठगा है ठगते रहेगे । इसलिए लोकतंत्र में जनता का शासन जनता के लिए कहना वेमानी सा लगता है।

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