21 सो रुपए आजाद हिंद भारत संगठन की ओर से ओंकार महाकालेश्वर मंदिर में किया दान

रिपोर्टर विजेंद्र यादव

सीतापुर -यह प्राचीन काल का शिव मंदिर है जोकि शिव मंदिर का नाम श्री रामेश्वर शिव मंदिर के रूप में स्थापित है जोकि रामकोट के राजा साहब ने स्थापित प्रतिष्ठित किया था उन्हीं के वंशजों का यह शिव मंदिर था उन्हीं की वंश में आगे चलकर राजा के पुत्र पुनः राजा हुए फिर उनका विवाह हुआ और उनकी पत्नी शिव से स्नेहा और शिव के प्रति बहुत आस्था थी वह ग्राम व पोस्ट रेसौरा में स्थित जो पूर्व शिव मंदिर था वहां रानी साहिबा आती थी और भगवान शिव की आराधना पूजा करती थी परंतु रानी साहिबा का रोज-रोज का आना राजा साहब को अच्छा नहीं लगता था फिर एक दिन राजा साहब ने यहां रेसौरा से शिवलिंग लेकर रामकोट अपने राजा बंगले में चले गए और विधि विधान से शिवजी का पूजन किया और जैसे ही रात्रि हुई वहां से रात्रि में शिवजी अपने स्थान पर आ गए यह राजा साहब ने कई बार किया यहां से ले जाते थे और वहां से शिवजी चले आते थे राजा ने अनेकों प्रकार के प्रयत्न किए वहां अपनी सेना लगाई सुरक्षा की फिर भी सुबह हुई जब देखा गया तो वहां से शिवजी चले आते थे फिर रात्रि में शिव जीने राजा साहब को स्वप्न दिया और कहा आप हमारे चक्कर में ना पढ़ो हम जहां हैं हमें वही रहने दो फिर राजा साहब शांत हो गए पर राजा साहब की पत्नी रानी साहिबा शिव जी को श्रद्धा भाव से पूजन करती रही शिवजी रानी साहिबा से प्रसन्न होकर रात्रि में सपने दिया यदि आप हमें यहां लाना ही चाहती हो तो स्वर्ण से विभूषित गाय ब्राह्मण को दान करो फिर मैं यहां आ जाऊंगा राजा साहब ने ऐसा ही किया फिर रात्रि में शिवजी ने रानी साहिबा को सपने दिया मैं आ तो जाऊंगा पर सबसे पहले आप पूजा नहीं कर पाओगे जब भी आप या कोई भी मंदिर जाएगा तो शिव जी का पूजन हो चुका होगा वही रामकोट मैं रामेश्वर नाम से शिव मंदिर प्रतिष्ठित है जिसका आज भी रात्रि में 12:00 बजे के बाद पूजन हो जाता है या घटता करीब 400 साल की है और यहां जहां से रेसौरा से शिव जी को ले गए थे यहां का स्थान ऐसे ही था फिर एक दिन हमें यानी कि शिवेश कुमार त्रिपाठी शास्त्री रात्रि में स्वप्न हुआ शिव मंदिर के बारे में तो हम समझ नहीं पाए और हमें यह स्थान पता भी नहीं था फिर एक दिन एक हमारे गुरुजी हैं उनके द्वारा घूमते हुए इधर आ गए तो हमने यह स्थान देखा जो हमें करीब 40 से 45 दिन पहले आया था फिर हमने वहां शिव जी को प्रणाम किया फिर हमने प्रार्थना की हे प्रभु जो यहां का प्रभाव है अस्तित्व है वह हमें नहीं पता है आप हमें इसके बारे में बताइए हम आपकी शरण में हैं फिर उसी दिन से रात्रि में हमें सपना आने लगा और स्वप्न में ही हमसे कहा गया यहां शिव जी की स्थापना करो फिर हम श्री नर्मदेश्वर शिव एवं महाकालेश्वर से सपरिवार को लाकर भगवान के प्राचीन स्थान पर स्थापना की भगवान की अत्यंत कृपा से हमारा निर्माण कार्य संपन्न हुआ फिर हमने भगवान के प्रेरणा द्वारा श्री ओमकार महाकालेश्वर मंदिर नाम दीया🙏 जय शिव🙏🙏 जय महाकाल🙏

Back to top button