थानाध्यक्ष का विदाई काफिला योगी के काफिले को दे रहा था मात, निलंबित। स्थानांतरित थानाध्यक्ष हुआ निलंबित ,बाकी पुलिस रडार पर।

बांकेलाल निषाद

जनपद अंबेडकरनगर -के बसखारी थाने के स्थानांतरित थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह का भव्य विदाई काफिला बड़ा महंगा पड़ा । उनकी विदाई समारोह में पूरा बसखारी थाने के जवान, हूटर बजाती हुई पीआरवी की गाड़ियां, हंटर में बैठे डान की तरह थानाध्यक्ष, 6 मोटर साइकिलों पर सवार 12 -15 सिपाही के जवान विदाई समारोह को काफी भव्य बना रहे थे । पीआरवी की दो गाड़ियों समेत थानाध्यक्ष की विदाई में कुल 9 गाड़ियां हूटर बजाते हुए आन रोड किसी मंत्री य मुख्यमंत्री के काफिले से कम जलवे नहीं दिखा रहे थे । पुलिस जवानों के गाड़ियों में बज रहे हूटर किसी दबंग मंत्री के लाल बत्ती के हूटर से कम नहीं लग रहे थे । नवो गाड़ियों के आगे 6 मोटरसाइकिलों पर सवार 12-15 पुलिस के जवान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुरक्षा में लगे ब्लैक कमांडो से कम शोभायमान नहीं हो रहे थे । नौजवानों के बाद हंटर में बैठे थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह थानाध्यक्ष कम और माफिया डॉन अधिक लग रहे थे। सैकड़ों फूल मालाओं से भरा हुआ थानाध्यक्ष का गला विधायक संजू देवी को चुनौती दे रहे था । फूल माला पहन थानाध्यक्ष मानो संजू देवी को यह चिढ़ा रहा थे कि हम आपके जीत के समय से ज्यादा माला पहन रखे हैं। विधायक और थानाध्यक्ष के बीच बर्चस्व की इस लड़ाई में उनका विदाई समारोह जनपद का यूनिक समारोह था ।आज तक इतना भव्य विदाई समारोह किसी थानाध्यक्ष का नहीं हुआ था। विधायक व थानाध्यक्ष के वर्चस्व की लड़ाई में विधायक संजू देवी के काफी मशक्कत के बाद थानाध्यक्ष का निलंबन की जगह स्थानांतरण हुआ था । हालांकि थानाध्यक्ष के लिए यह समारोह काल बन बैठा । विधायक संजू देवी द्वारा लगाए गए आरोप अवैध वसूली और कार्यकर्ताओं का सम्मान न करना , की जांच अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार मिश्र कर ही रहे थे, उनके जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी ही था कि थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह की हेकड़ी ही उनके लिए काल बन गई । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के काम में हस्तक्षेप न करने का जो फरमान जारी था उसमें विधायक और थानाध्यक्ष के बीच प्रतिष्ठा का विषय बन चुका था। पुलिस अधीक्षक के लिए यह चुनौती खड़ी हो गई थी हम जनप्रतिनिधि की सुने या अपने थानाध्यक्ष की। हालाकी यह असमंजस पुलिस अधीक्षक के मन में चल ही रहा था कि इधर थानाध्यक्ष की हेकड़ी ही उनके लिए काल बन गई । थानाध्यक्ष ने अवसर दिया पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी अपने थानाध्यक्ष के इस करतूत में दंड देने में तनिक भी देर नहीं लगायी। विधायक के आरोप धरा का धरा रह गया अपर पुलिस अधीक्षक का जांच रिपोर्ट अभी ऑफिस में पड़ा ही था कि तब तक थानाध्यक्ष का उतावलापन थानाध्यक्ष को ही ले डूबा। इस भव्य समारोह में थानाध्यक्ष समेत समस्त स्टाफ न कोई मास्क लगाया था न सोशल डिस्टैंसिंग और न ही पुलिसिया अनुशासन ही था । हालांकि उन्हें गैर जिम्मेदाराना हरकत का खामियाजा भुगतना पड़ा। विधायक को बहती गंगा में हाथ धोने का अवसर भी मिल गया। उनके आरोपण प्रत्यारोपण के लिए यह विदाई समारोह तिनके का सहारा का काम किया । अंततः पुलिस अधीक्षक को अपने थानाध्यक्ष के खिलाफ कलम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा । पुलिस अधीक्षक अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार मिश्र के जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह को निलंबित कर उनको कानून के दायरे में और पुलिस अनुशासन में रहने के लिए नसीहत दे दी । हालांकि और भी बसखारी थाने के सिपाही पुलिस अधीक्षक के रडार पर हैं । इन्हें अपने थानाध्यक्ष की बात मानना ही मानना है । अभी विधायक और थानाध्यक्ष के वर्चस्व की लड़ाई में थानाध्यक्ष का साथ देने वाले कितने जवानों पर पुलिस अधीक्षक की कलम चलेगी इसका इंतजार अभी बाकी है।

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