कोतवाली के नाक के नीचे दबंगों की दबंगई ,मारपीट ,मुकदमा दर्ज दर्जनों गुर्गों के साथ विनोद यादव की गुंडागर्दी, हत्या वारदात टला

बांकेलाल निषाद

जनपद अंबेडकरनगर- के कोतवाली जलालपुर के नाक के नीचे मालीपुर रोड पर रेडिएंट कॉलेज के प्रबंधक विनोद यादव ने दर्जनों गुर्गों और जेसीबी के साथ विवादित जमीन पर कब्जे की नियत से जा पहुंचे । पहुंचते ही भाजपा नेता एवं पूर्व प्रधान उमेश विश्वकर्मा को शटर गिराकर कमरे में बंद कर दिये। इतने में उमेश विश्वकर्मा के परिवार वालों में उनकी पत्नी दो नाबालिग बच्चियां और एक ग्यारह साल का छोटा सा बच्चा उमेश विश्वकर्मा को शटर में बंद होते देख उग्र हो गये। सटर उनकी दोनों नाबालिग लड़कियां खोलने का प्रयास की लेकिन विनोद यादव के गुर्गे उन लड़कियों के ऊपर टूट पड़े और खींचकर दूसरी लड़की को भी उनके गुर्गे शटर के अंदर बंद करने का प्रयास किये। लेकिन किसी तरह से लड़की छुड़ाकर बाहर आ गयी । लड़कियों से उनके गुर्गों ने बदतमीजी और छेड़खानी हाथापाई करते हुए गाली गलौज करने लगे। इतने में किसी तरह दोनों लड़कियां उमेश विश्वकर्मा को सटर उठाकर बाहर निकाली। उमेश विश्वकर्मा के बाहर आते ही उनके परिवार वाले विनोद यादव और उनके गुर्गों पर टूट पड़े । जमकर दोनों पक्षों में मारपीट हुई । मारपीट के दौरान उमेश विश्वकर्मा के हाथ ईट लगा और उसी से 2-4 ईंट विनोद यादव के मखमली शरीर पर दे मारा। विनोद यादव की मखमली शरीर ईंट की चोट सहन नहीं कर पाया। किसी तरीके से विनोद यादव अपनी कार के पास पहुंचे। पुनः मारपीट की नियत से गुर्गों के साथ वापस आ रहे थे कि इतने में उमेश विश्वकर्मा की पत्नी ने बीच-बचाव करके किसी तरीके से मामले को शांत किया ।लेकिन ताज्जुब है कि पैसे के नशे में धुत दस पंद्रह गुर्गों के साथ जेसीबी समेत विनोद यादव अपनी दबंगई दिखाने और कानून का हश्र उड़ाने विवादित जमीन पर कब्जा करने की नियत से जिस तरीके से पहुंचे थे यह ऐसे सम्मानित और पैसे वाले रेडियंट जैसे विद्यालय के प्रबंधक को शोभा नहीं देता। ताज्जुब की बात यह है कि विनोद यादव और उमेश विश्वकर्मा के बीच कम से कम आधे घंटे तक नोकझोंक गाली गलौज मारपीट फौजदारी आमदा होता रहा लेकिन विनोद यादव की ऐसी सेटिंग थी कि न तो कोई पीआरवी की गाड़ियां आई न तो कोई पुलिस वाला आया और न ही तहसील का कोई कर्मचारी ही वहां पहुंचा । तहसील/ थाना और विवादित जगह के बीच मात्र एक किलोमीटर का फासला है इसके बावजूद भी कोई भी थाना तहसील का कर्मचारी वहां नहीं पहुंचा। ऐसा लग रहा है मानो किसी हत्या वारदात की घटना का इंतजार जलालपुर तहसील और थाना का प्रशासन कर रहा था। योगी जी भू माफियाओं और गुंडों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश अपने प्रदेश के अधिकारियों को दे चुके हैं लेकिन इतना होने के बावजूद भी मात्र दोनों पक्षों की तरफ से एनसीआर दर्ज हुआ है। दर्जनों गुर्गों के साथ जेसीबी ले जाकर किसी दबंग द्वारा विवादित जगह पर कब्जा करना और प्रतिवादी व्यक्ति को शटर के अंदर बंद कर देना इससे बड़ा अपराध और क्या हो सकता है । लेकिन इसके बावजूद भी कोई कार्यवाही ना होना इससे जलालपुर प्रशासन पर उंगलियां उठ रही है। उमेश विश्वकर्मा को इसके पहले भी दिसंबर माह में बरात से लौटते वक्त गोली मारी गई थी जिसमें चार-पांच लोग नामजद हैं उसमें विनोद यादव का भी नाम है।बताया जाता है कि उस नामजद में से भी दो एक गुर्गे इस वारदात में शामिल थे । जिस तरह से उमेश विश्वकर्मा को शटर बंद करके उनकी लड़कियों के साथ छेड़छाड़ हुआ और जमकर गुंडई हुई ऐसा लगता है इसमें बहुत बड़ा खेल रचा जा रहा है। जब तक विवाद चल रहा था न तो कोई पुलिस आई न तो कोई तहसील का कर्मचारी और इसके बावजूद भी इस घटना के बाद भी इन गुर्गों का धरपकड़ न होना प्रशासन की मिलीभगत को प्रलक्षित करता है।

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