सामाजिक रीत रिवाज के जज्बे को नहीं रोक पा रहा है कोरोना का खंजर

अजय कुमार तिवारी

अंबेडकर नगर -वैश्विक महामारी का रूप ले चुका कोरोना से जहां दुनिया खौफ के साए में जी रही है वही हमारे भारत में भारतीय संस्कृति की रीति रिवाज के जज्बे के सामने कोरोना बौना साबित हो रहा है। भारत सरकार द्वारा जैसे ही लॉक डाउन में ढील दी गई वैसे ही हमारे देश की जनता एक लीडर सैनिक की भांति अपने रीति रिवाज ,मरना ,जीना शादी विवाह जैसे संस्कारो को करते हुए लाक डाउन का पालन करते हुए कार्यक्रम बेखौफ होकर कर रही है । हमारे रीति रिवाज के आगे कोराना बौना साबित हो रहा है। 80 साल के ग्राम सेमरा निवासी हरिशंकर मिश्रा के सुपौत्र की शादी 14 जून को तय थी ।उनको लग रहा था कि अपने सुपौत्र की शादी कोरोना के चलते नहीं देख पाऊंगा। शादी का कार्यक्रम स्थगित करने के पूरे चांस थे। लेकिन परिवार ने उनके जज्बातों को देखते हुए, समझते हुए शादी निश्चित समय पर ही तय करने का प्लान बनाया और उनके सुपौत्र राहुल की शादी कोड़रहां भटपुरवा निवासी अशोक कुमार पांडे की सुपुत्री सोनम से 14 जून को शादी करा दी गई । शादी होते समय 80 साल के हरिशंकर मिश्रा मन ही मन मुस्कुरा रहे थे कि मैंने अपने आखिरी समय में अपने सुपौत्र की शादी अपनी आंखों से देख लिया । इसी तरह समाज में हम लोगों का आपसी प्रेम और जज्बा इतना ज्यादा है कि कोरोना जैसे खतरनाक वायरस के सामने हम अपने रीति-रिवाजों का निर्वहन करने में तनिक भी हमारे अंदर डर नहीं है। हमारा यही भाईचारा भारतीय संस्कृति की रीत रिवाज हमको हमको और हमारे हमारे लोगों को देश की सीमा पर भी मजबूत करता है ।गौरतलब है कि इस शादी में बैंड बाजे की जगह अवधी में औरतों के गीत की गालियां शादी को रंगीन बना रही थी। मास्क लगाए दूल्हा दुल्हन जैसे उबन महसूस कर रहे थे। पंडित जी द्वारा किया जा रहा मंत्रोच्चारण उनकी मास्क में ही दवा जा रहा था ।जो भी हो लड़की वाले अंदर ही अंदर खुश थे ।एक बहुत बड़ी बजट वाली बारात का स्थान हल्के बजट ने ले लिया। जो भी हो लॉक डाउन की शादियां लड़की और लड़के पक्ष दोनों को बिना टेंशन देने वाली शादी है। अगर इसी तरह शादियों को समाज स्वीकार कर ले तो कोई मां-बाप अपनी लड़की को अभिषाप ना समझें । बहुत थोड़े में ही निपट गया ।

Back to top button