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श्रमिको को घर पहुचाने के दावे फेल

बाराबंकी – सरकार भले ही लॉक डाउन के दौरान परेशानहाल श्रमिकों को स्पेशल ट्रेनों के ज़रिए उनके घर पहुचाने के दावे कर रही हो लेकिन ज़मीनी हकीकत इन सरकारी दावों से काफी अलग नज़र आ रही है । तमाम प्रवासी मजदूर ऐसे है जो अपने घरों तक पहुचने के लिए अभी तक जद्दोजहद कर रहे है । बिहार के खगड़िया जिले का रहने वाला अमरजीत मुखिया भी ऐसे ही बदनसीब लोगो मे से एक है जो पंजाब के लुधियाना शहर में रिक्शा चलाने का काम करता था । लॉक डाउन के चलते उसका काम धन्धा बन्द हो गया और सरकार के तमाम दावों के बाद भी जब रिक्शा चालक अमरजीत को बिहार जाने के लिए ट्रेन का टिकट नही मिला तो अपने रिक्शे पर ही घर गृहस्थी का सामान और पत्नी सहित परिवार के 6 लोगों को बैठाकर बीती 5 जून को वो लुधियाना से बिहार के लंबे सफर पर निकल पड़ा । 10 दिनों तक दिनरात रिक्शा चलाकर अमरजीत किसी तरह अपने परिवार के लोगो को बाराबंकी तक तो ले आया लेकिन यहां आते आते उसके रिक्शे ने भी उसका साथ छोड़ दिया । ऐसे में उसके पास जो थोड़े बहुत पैसे बचे थे वो रिक्शे की मरम्मत कराने में खर्च हो गए । अब अमरजीत को ये समझ नही आ रहा है कि बिना पैसे और खाने पीने के समान के बिना उसका आगे का सफर कैसे कटेगा । बातचीत के दौरान अमरजीत ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि लॉक डाउन का सबसे ज्यादा असर गरीबो पर ही पड़ा है ।

रिपोर्ट – राशिद अली सिद्दीकी

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