जब प्रधान व सचिव का आवास व शौचालयों में भारी भरकम हो कमीशन तो कहाँ से बने अधूरे शौचालय व आवास ।

ब्यूरो रिपोर्ट पुनीत यादव

यूपी के सीतापुर- जिले में भ्र्ष्टाचार अपनी चरम सीमा लाँघता दिख रहा है अगर हम बात करे स्वच्छता अभियान या आवासो की तो शौचालयों तथा आवासों में पँचायत सचिव व ग्राम प्रधान मिलकर बन्दरबाँट करके अपनी तिजोरी भरने से बाज नही आते दिख रहे है शौचालयों की स्थिति वद से बदतर दिख रही है जिसमे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का स्वच्छता अभियान का सपना पूरा नही होता दिख रहा है उनको पलीता लगाने से बाज नही आ रहे है इसमें पँचायत सचिव व ग्राम प्रधान पूर्ण जुम्मेदार दिख रहे है अगर उदाहरण के तौर पर देखा जाय तो ग्राम पंचायत रौरापुर के जुड़े मजरा सिकंदरा में लोगो का शौचालय में कही टैंक नही बने है तो कही अधबने शौचालय निर्माण अपनी कहानी बयां कर रहे है कि घोटाला हुआ है लोग अधबने शौचालयों में गंदगी खुले में बह रहे है उनके आस पास के रहने वालों को रहना दुस्वार हो गया है लोग नारकीय जीवन से परेशान हो कर सैकड़ो प्रार्थना पत्र लिखकर अधिकारियों को दिया लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नही दिख रहा है यह आखिरकार बन्दरबाँट नही है तो क्या है यह पूरा मामला रौरपुर मजरा सिकन्दरा का है जिसमे अवधेश ,जगदीश ,रामनरेश ,रामबक्श आदि ने बताया ।

वही ग्राम पंचायत उचाखेर सरैया में भी आवासों व शौचालयों में ग्राम प्रधान व सचिव ने जमकर वसूली करने की बात आवास पाने वालों ने बतायी जिसमे मोहन ने बताया कि मुझसे ग्राम प्रधान देशराज ने 30 हजार रुपये ले लिए है इतना ही नही किसी से 26 हजार डकारे उसी गाँव के जगदीश ने बताया कि हमारा आवास अधूरा पड़ा है पैसे नही है प्रधान ने 22 हजार रुपये ले लिए है । इसी प्रकार ग्रामीणों ने बताया कि जो प्रधान देहराज को घूस देता है उसी को आवास दिया जाता है नही तो लिस्ट में होने पर भी आवास काट दिया जाता है । देखना यह है कि आवासों व शौचालयों में हुए बन्दर बाँट में क्या कार्यवाही होती है या उच्च अधिकारियों द्वारा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है ।

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