सामाजिक रीति रिवाज के जज्बे को नहीं रोक पा रहा करोना का खंजर

चन्द्र प्रकाश तिवारी

जनपद गोंडा -के मानिकपुर तहसील अंतर्गत ग्राम बरदही के इस वैश्विक महामारी का रूप ले चुका कोरोना से जहां दुनिया खौफ के साए में ही जी रही है वहीं भारत में भारतीय संस्कृति की रीत रिवाज के जज्बे के सामने करो ना बौना साबित हो रहा है भारत सरकार द्वारा जैसे ही लॉकडाउन में ढील दी गई वैसे ही हमारे देश की जनता एक लीडर सैनिक की भांति अपने रीति रिवाज मरना जीना शादी विवाह जैसे संस्कारों को करते हुए लाक डाउन का पालन करते हुए कार्यक्रम बेखौफ होकर कर रहे हैं हमारे रीति रिवाज के आगे करो ना बौना साबित हो रहा है। मनिकापुर के विनोद कुमार कश्यप के सुपुत्री की शादी 20 अप्रैल को तय थी। लेकिन करोना के चलते शादी कैंसिल कर के 25 जून को लाक डाउन में ढील देखते हुए शादी तय किया गया तथा इसी समाज में हम लोगों का आपसी प्रेम और जज्बा इतना ज्यादा है कि करो ना जैसे खतरनाक वारिस के सामने हम अपने रीति-रिवाजों का निर्वहन करने में तनिक भी हमारे अंदर डर नहीं है हमारा यही भाईचारा भारतीय संस्कृत की रीत रिवाज हमको और हमारे लोगों को देश की सीमा पर भी मजबूत करता है गौरतलब है कि इस शादी में बैंड बाजे की जगह अवधि में औरतों की गीत की गालियां शादी को रंगीन बना रही थी मास्क लगाए दूल्हा दुल्हन घुटन महसूस कर रहे थे। जहां पान सुपारी की जगह सेनीटाइजर हाथों में दिया जा रहा था।पंडित जी द्वारा किया जा रहा मंत्र उच्चारण उनकी मास्क में ही दबा जा रहा था। जो भी हो लड़की वाले अंदर ही अंदर खुश थे एक बहुत बड़ी बजट वाली बारात का स्थान हल्के बजट में ले लिया जो भी हो लॉकडाउन की शादियां लड़की और लड़के दोनों पक्षों को बिना टेंशन देने वाली शादी है अगर इसी तरह साथियों को समाज स्वीकार कर ले तो कोई मां बाप अपनी लड़की को अभिशाप ना समझे बहुत थोड़े में ही निपट जाए।

Back to top button