हवालात में युवक की संदिग्ध हालात में मौत लापरवाह एक इंस्पेक्टर सहित तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड गोमतीनगर विस्तार थाने में हुई घटना बेल्ट के सहारे लगाई फांसी

चोरी के आरोपी में पकड़ा गया था युवक

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। गोमतीनगर विस्तार थाने के हवालात में गुरुवार रात चोरी के आरोप में पकड़े गए 25 वर्षीय उमेश की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। उसका शव हवालात में मिलने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर संजय सिंघल सहित कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन शुरू की।
पुलिस उमेश को अस्पताल भेजा, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बताया जा रहा है कि उमेश ने हवालात में बेल्ट के सहारे खुदकुशी कर ली है।
इस मामले में जांच पड़ताल के बाद लापरवाह अतिरिक्त इंस्पेक्टर बृजेश सिंह यादव समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
वहीं हवालात में में युवक की हुई मौत को लेकर लोगों में तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त है।
जानकारी के मुताबिक सीतापुर जिले के सुमौली गांव निवासी 25 वर्षीय उमेश पुत्र मनोहर गोमतीनगर विस्तार के कौशलपुरी कॉलोनी में किराए पर रहता था।
बताया गया कि दो दिन पहले मकान मालिक ने उमेश पर चोरी का आरोप लगाया और इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस उमेश को थाने लेकर आई और पुलिसिया कार्रवाई कर चोरी की धारा में उमेश को लॉकअप में ठूंस दिया।
जानकार सूत्रों की मानें तो उमेश मकान मालिक और पुलिस के सामने चोरी न करने को लेकर गिड़गिड़ाता रहा लेकिन उसके खिलाफ कार्रवाई कर पुलिस हवालात में डाल दिया।
नतीजतन गुरुवार की रात उमेश हवालात में बेल्ट के सहारे फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
शुक्रवार की सुबह हवालात में फांसी पर लटका देख थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए और आनन-फानन में उसे अस्पताल भेजा जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
लॉकअप में में हुई घटना की सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर संजय सिंघल सहित कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन शुरू की।
वहीं सूत्र बताते हैं कि पहले पुलिस घटना को दबाने का प्रयास करती रही और उमेश के घर वालों को भी इसकी सूचना नहीं दी गई थी।
आंशका है कि पुलिस की पिटाई से आहत होकर उमेश ने यह कदम उठाया।
अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर संजय सिंघल ने अतिरिक्त इंस्पेक्टर बृजेश कुमार सिंह यादव समेत तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
, लखनऊ में यह पहला मामला नहीं,
राजधानी लखनऊ में पुलिस की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी पुलिसिया कार्रवाई से कस्टडी डेथ हो चुकी है।
वर्ष 2011 में डिप्टी सीएमओ डॉ वाईएस सचान की जेल में संदिग्ध हालात में मौत हुई, जबकि 17 अप्रैल 2013 को हसनगंज कोतवाली की हवालात में वीरेंद्र मिश्रा नाम के युवक का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था।
सवाल है कि चाहे जितना भी भी पुलिस अधिकारी मातहतों को चौकन्ना और सतर्क रहने तथा आरोपी के साथ नरम बर्ताव करने का पाठ पढ़ा रहे हों लेकिन वे लगातार कुछ न कुछ गलतियां कर पुलिस महकमे को बदनाम करने में जुटे हुए हैं।

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