पुलिस पर भारी पड़ रहे बेखौफ अपराधी कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या से सकते में पुलिस महकमा

ए अहमद सौदागर

लखनऊ ‌। यूपी में में लगातार पुलिस का इकबाल गिरता जा रहा है, जबकि अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। प्रदेश में जब पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी को बनाया गया तब लोगों की उम्मीदें जागी थी कि अब अपराधियों की सक्रियता ढीली पड़ेगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उल्टा। बीते कुछ महीनों में ही अपराधियों की सक्रियता से कई पुलिसकर्मी घायल हुए और कई पुलिसकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
जनपद कानपुर देहात के चौबेपुर थाना क्षेत्र के विकरू गांव निवासी खूंखार इनामी बदमाश विकास दुबे को पकड़ने के लिए सीओ बिल्हौर देवेन्द्र कुमार मिश्र टीम के साथ दबिश देने पहुंचे ही थे कि साथियों के साथ घर में मौजूद अपराधी विकास दुबे पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिससे आठ पुलिसकर्मियों सीओ देवेन्द्र कुमार मिश्र, थाना प्रभारी महेश यादव, चौकी प्रभारी मंधना अनुप कुमार, सब इंस्पेक्टर नेबूलाल, कांस्टेबल सुल्तान सिंह, राहुल, जितेंद्र व बबलू की जान ले ली। हालांकि बहादुर पुलिस जवानों ने बदमाश विकास दुबे का मामला प्रेम प्रकाश पाण्डेय व अतुल दुबे को मार गिराया।
इसी तरह दो मार्च 2013 को प्रतापगढ़ जिले में तिहरे हत्याकांड को कौन नहीं जानता , जहां ग्राम प्रधान की हत्या के उपजे तनाव को निपटाने गए सीओ कुंडा जियाउल हक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।
इस सनसनीखेज मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा बड़े बड़े दावे किए गए, लेकिन यह सारे दावे कागजों तक ही सीमित होकर रह गए। नतीजतन बेखौफ बदमाशों का कहर थमने के बजाए फिलहाल बढ़ता जा रहा है। हो रहे हमलों से पुलिस की वर्दी लहूलुहान हो रही है।

,,,,,,,
आखिर कब तक लहूलुहान होती रहेगी खाकी
जिस खाकी के खौफ से बड़े-बड़े खूंखार अपराधियों के पसीने छूट जाते थे, वहीं बहादुर पुलिस जवान संकट में हैं।
साल-दर-साल हो रहे हमलों से पुलिस की वर्दी लहूलुहान हो रही है।
इसे रोकने की जितनी कोशिश हो रही है, वारदातें उतनी ही बढ़ती जा रही है।
अगर इसी तरह पुलिस जवान पिटते और उनकी जान जाती रही तो कानून-व्यवस्था संभाल पाना बेहद मुश्किल होगा।
,,,, लचर व्यवस्था पर एक नजर, दो मार्च 2013 को प्रतापगढ़ जिले के सीओ कुंडा जियाउल हक की हत्या।
चित्रकूट में बदमाश पकड़ने गए दिल्ली के दरोगा की हत्या।
आगरा में दबिश देने गए मथुरा में सिपाही सतीश की हत्या।
सहारनपुर में लुटेरों को पकड़ने की कोशिश में सिपाही राहुल की हत्या।
बरेली में दबिश देने गए सिपाही अनिरुद्ध की हत्या।
बागपत में बड़ौत चौकी में घुसकर सिपाही विक्रम भाटी की हत्या।
फिरोजाबाद जिले में आगरा कानपुर हाईवे पर बदमाशों को पकड़ने गए सिपाही रमाकांत की गोली मारकर हत्या।
गाजियाबाद जिले में एसपी सिटी के यहां तैनात सिपाही कृष्णपाल की बड़ौत में गोली मारकर हत्या।
2011 में लखनऊ में बदमाशों ने एक सिपाही की गोली मारकर हत्या कर दी और सरकारी कार्बाइन लूट ले गए।
इन मामलों को लोग भुला भी नहीं पाए थे कि कानपुर देहात में खूंखार हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को उसके घर दबिश देने गई पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर बदमाशों ने सीओ सहित आठ पुलिसकर्मियों के सीने पर गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुला दिया। फिलहाल यह तो बानगी भर है और भी कई बहादुर पुलिस जवानों की जानें जा चुकी है, इसके बावजूद भी जिम्मेदार अफसर मूकदर्शक बने हुए हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

Back to top button