सिस्टम के रहस्य का एनकाउंटर या विकास दूबे का एनकाउंटर ?

 

बांकेलाल निषाद

 

 

अंबेडकर नगर -लगातार 30 वर्षों से अपराध की दुनिया में कांग्रेस, सपा, बसपा और भाजपा ,नौकरशाहों की मिलीभगत से सिस्टम के सह्य से अपराध की गंगा में गोता लगाते हुए सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत सात पुलिसकर्मियों को मारकर आठवें दिन पुलिस और एसटीएफ की मुठभेड़ में ढेर विकास दुबे के एनकाउंटर के साथ-साथ सिस्टम के रहस्य का भी काउंटर हो गया । 30 वर्षों का लंबा अपराधिक सफर हर सरकारों में सिस्टम से लैस विकास दूबे तब तक दुर्दांत नहीं था जब तक कि उसने सिस्टम को चुनौती नहीं दी। जैसे ही उसने सिस्टम को चुनौती देते हुए सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत सात पुलिसकर्मियों को ढेर किया तैसे ही 8 ही दिन में वह टॉप का अपराधी बन गया और आठ ही दिन में 5 लाख का इनामी बदमाश हो गया,कुख्यात बदमाश हो गया। कानपुर से लेकर दिल्ली एनसीआर फरीदाबाद का सफर तय करते हुए उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सरेंडर के बाद पुनः कानपुर से पहले सचेंडी थानाक्षेत्र में ही एनकाउंटर के बाद उसके अपराधिक सफर का अंत हो गया । यदि इन आठ पुलिसकर्मियों के अलावा उसने 20 लोगों को मारा होता तो वह दुर्दांत नहीं रहता और सिस्टम के सह्य से फिर बच जाता और माननीय बना रहता । लेकिन सिस्टम को चुनौती दी और मारा गया। सवाल यह उठता है विकास दुबे ने 90 के दशक में सर्वप्रथम अपने पिता का बदला लेने के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखा । उसकी पहली हत्या सन 2000 में इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडे की रही । दूसरी हत्या उसने शिवली थाने में ही दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या राजनीतिक वर्चस्व के चलते की । उसका आजीवन कारावास हुआ लेकिन लगभग 30 पुलिस स्टाफ उस समय हत्या के समय मौजूद थे लेकिन कोई भी विकास दूबे के खिलाफ गवाही नहीं किया वह छूट कर बाहर आया और सिस्टम के सहारे पुनः अपराध की दुनिया में अपनी बढ़त बनाए रखा । तत्पश्चात दिनेश दुबे, सोने लाल चतुर्वेदी, अजय मिश्रा ,कृष्ण बिहारी मिश्रा, कौशल तिवारी, साधू ,और सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की हत्या की । लगभग 15 गांव में उसका दबदबा था ।उसके ऊपर सिस्टम का इतना जबरदस्त वरदहस्त था कि उसके ऊपर 71 मुकदमे दर्ज हुए लेकिन किसी में भी सजा नहीं हुई । उसके खिलाफ कोई गवाही करने की हिम्मत नहीं रखता था ।पुलिस अधिकारियों के आलाकमान राजनीतिक पहुंच ने उसे इतना ताकतवर बना दिया था कि उसने सिस्टम के एक अंग 2 जुलाई की रात थाने से ही सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया । इस घटना के पहले विकास दूबे दर्जनों हत्या कर चुका था लगभग 71 मुकदमे भी उसके ऊपर लगे थे लेकिन इसके बावजूद भी वह माननीय बना रहा । प्रधानी जीता ,जिला पंचायती जीता, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , नितिन गडकरी , भाजपा सुप्रीमो अमित शाह, कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक, सुनील बंसल आदि नेताओं के साथ उसके गहरे संबंध रहे हैं । इन सबों के आलावा पुलिस आलाकमान से भी उसके गहरे रिश्ते और अच्छे संबंध थे । इसीलिए 3 माह पहले सीओ देवेंद्र मिश्रा चौबेपुर थानाध्यक्ष द्वारा विकास दुबे की मदद के संबंध में चिट्ठी एसएसपी को लिखा था लेकिन उसको ठंडे बस्ते में डाल दिया गया यहां तक कि सीओ ऑफिस और एसएसपी ऑफिस में कहीं भी चिट्ठी का रिसीविंग तक शिनाख्त नहीं मिल रहा है । हालांकि अनंत देव हटाकर पीएससी में कर दिए गये वह भी सीओ देवेंद्र मिश्रा की हत्या के बाद । सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत सात पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद और सिस्टम को चुनौती देने के बाद वही माननीय विकास दूबे अब दुर्दांत कुख्यात 5 लाख का इनामिया बदमाश यूपी पुलिस द्वारा घोषित हो गया । आठ ही दिन में माननीय से कुख्यात बदमाश बना और उसका अंत कर दिया गया । यह विकास दुबे का इनकाउंटर नहीं बल्कि सिस्टम के रहस्य का एनकाउंटर हुआ है। इसको पकड़ा गया था यूपी पुलिस चाहती तो पूरे सिस्टम के रहस्य का पर्दा विकास दूबे के माध्यम से खुल जाता कौन-कौन लोगों ने विकास दूबे को यूज करके ऊंचे ऊंचे कुर्सियों पर पहुंचे थे कौन-कौन पुलिस के आला अधिकारी उसकी मदद कर रहे थे इन सबों से पर्दा उठ जाता। विकास दूबे जिंदा रहता तो उससे सारी बातें पता चलती कि उसके अपराध के हाथ कितने लंबे थे किन-किन नेताओं को ऊंची कुर्सी तक पहुंचाने में उसने अपने हाथों को खून से रंगा था । सिस्टम के किन किन अंगो को मजबूत करने के लिए उसने अपने ऊपर दर्जनों मुकदमे ओढ लिए थे?। सपा बसपा भाजपा और कांग्रेस सभी के कार्यकाल में उसने अपराध की गंगा में गोता लगाया था और साथ ही साथ राम राज्य में भी सरकार के साथ साथ नौकरशाहों का भी वरदहस्त इसके ऊपर बराबर बना रहा और अपराध की दुनिया में खुद काफी ऊंचाई तक पहुंचा और लोगों को पहुंचाया भी । यह जांच का विषय है । विकास दुबे का एनकाउंटर कम और सिस्टम के रहस्य का एनकाउंटर ज्यादा हुआ है । काश विकास दुबे जिंदा रहता तो कई बड़े-बड़े मंत्री और पुलिस के आला कमान जांच के घेरे में आते । विकास दूबे के हृदय में दबी रहस्य का इनकाउंटर करके यूपी पुलिस और एसटीएफ कई लोगों का एनकाउंटर होने से बचा दिया है । हालांकि उत्तर प्रदेश की राजनीतिक विशात विकास दुबे जैसे ही कुख्यात के अपराध की नींव पर खड़ी होती है । उत्तर प्रदेश में लगभग 42 मंत्री विधायक ऐसे हैं जिनका हाथ और जिस्म अपराधिक खून से सने हुए और सफेदपोश अपराध के वाहक बने हुए हैं । इन सब के बावजूद भी न केवल कांग्रेस सपा बसपा में भी उनका दबदबा था बल्कि राम राज्य में भी उनका दबदबा बना हुआ है । देश के 78000 अपराधिक रिकॉर्ड में 38000 मामले मात्र यूपी के हैं । यह इन्हीं सफेदपोश अपराधियों की देन है । बसपा सरकार में बसपा सुप्रीमो मुख्यमंत्री रहते अपने 42 विधायकों के खिलाफ कार्यवाही की थी । सपा सरकार रहते सपा के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी मऊ दंगे में सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था लेकिन माननीय मुलायम सिंह जी और सिस्टम का उसके ऊपर इतना जबरदस्त वरददस्त था कि मुख्तार अंसारी का बाल बांका नहीं हुआ । इस समय वह जेल में है । बृजेश सिंह माफिया, अतीक अहमद जैसे लोग किसी की भी सरकार हो इनका अपराध कम नहीं होता और न ही उनका दबदबा कम होता है । ये सिस्टम की देन है ।आज सीओ देवेंद्र मिश्रा जैसे लोग नहीं मारें गये हैं यह नई बात नहीं है इसके पहले प्रतापगढ़ में सीओ जिया उल हक को भी राजनीतिक वर्चस्व के चलते मौत के घाट उतार दिया गया था । खतरा विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद टला नहीं है खतरा बराबर बना हुआ है । पूरा सिस्टम जब तक इन कुख्यातों को यूज करता है तब तक माननीय हैं या यूं कहें जब तक वह सिस्टम को चुनौती नहीं देते तब तक अपराधी की गणना में नहीं आते और जैसे ही ये सिस्टम को चुनौती देने लायक हो जाते हैं या दे देते हैं तब वे अपराधी कहलाने लगते हैं कुख्यात हो जाते हैं इनामी बदमाश घोषित हो जाते हैं और उनका इनकाउंटर कर दिया जाता है । फूलन देवी के साथ दर्जनों लोगों ने बलात्कार किया पूरा सिस्टम चुप रहा जब उसने इसका बदला ले लिया तो सिस्टम हाय तौबा मचाने लगा उसको जेल में डाल दिया गया । पुनः सिस्टम ने उसे बाहर निकाल कर सांसद बना दिया और जब उसने सिस्टम को चुनौती देने का प्रयास किया तैसे ही उसको शेर सिंह राणा के माध्यम से सिस्टम ने उसका अंत कर दिया और इसी भाजपा की सरकार ने शेर सिंह राणा को जेल से बाहर कर उसे अपना स्टार प्रचारक बनाया । अधिकतर अपराधी समय रहते न्याय न मिलने और समय रहते पुलिसिया कार्यवाही न हो पाने की वजह से पीड़ित अपराध की दुनिया में आने के लिए मजबूर हो गये और अंततः सिस्टम को चुनौती देने लगे । घनश्याम केवट जो 52 घंटे पीएसी एसटीएफ मुठभेड़ के समय 4 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था उसकी बहन के साथ उसके गांव का ही निवासी बृजभान सिंह ने रेप किया और जब वह राजापुर थाने में गया तो थानस्टाफ उसको गाली गलौज देकर भगा दिया और अंततः अपनी बहन का रेपिस्ट बृजभान सिंह को गोली मारने के बाद वह अपराध की दुनिया में दर्जनों लोगों की हत्या की, लूटपाट डकैती उसके ऊपर कायम हुआ और अंततः 2 दिन तक 400 पुलिसकर्मियों के साथ भी एसटीएफ पीएसी समेत 52 घंटे लगातार अकेले सिस्टम के नाक में दम कर दिया और मरते मरते चार पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया । वीरप्पन मशहूर चंदन तस्कर कई राज्यों के लिए चुनौती बन गया था उसकी बहन के साथ उसके ही आंखों के सामने दरिंदों ने बलात्कार किये और जब उसे न्याय नहीं मिला तो उसने भी अपराध की दुनिया में कदम रखा और अंत में सिस्टम को चुनौती दी और मारा गया । मशहूर माफिया श्री प्रकाश शुक्ला के बल पर बहुत से लोग मंत्री विधायक ऊंचे ऊंचे पदों पर गये और वह भी माननीय बना रहा लेकिन जब भाजपा के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को उसने सुपारी ली तब जाकर वह भी दुर्दांत और कुख्यात हुआ उसे भी इन काउंटर में ढेर कर दिया गया। ठोकिया और ददुआ की भी सेम यही कहानी है । इलाहाबाद करेली में अतीक अहमद हजारों एकड़ जमीन को कब्जा किए हुए है । उसके खिलाफ कोई भी बोलने वाला नहीं है क्योंकि उसे बराबर सिस्टम का संरक्षण मिलता रहा। उसके खिलाफ जो भी बोलता है उसे मौत के घाट उतार दिया जाता लेकिन उसका एनकाउंटर नहीं हुआ क्योंकि उसने सिस्टम को अभी तक चुनौती नहीं दी । मुख्तार अंसारी का भी एनकाउंटर नहीं हुआ क्योंकि वह भी अभी सिस्टम को चुनौती नहीं दिया है । बृजेश सिंह माफिया का भी इनकाउंटर नहीं हुआ क्योंकि उसने भी अभी सिस्टम को चुनौती नहीं दिया है जैसे ही ये तीनों य अन्य विकास दुबे की ही तरह सिस्टम को चुनौती देंगे वे भी मौत के घाट उतार दिए जाएंगे नहीं तो सिस्टम इन्हें कहीं न कहीं यूज़ करके अपने खौफ और कुर्सी को बरकरार रखेगा । इन माफियाओं दुर्दांतो कुख्यातों का इतना चला बला रहता है अपने-अपने क्षेत्रों में या प्रदेशों में कि वहां पर संविधान का कानून ,पुलिस का भय बिल्कुल नहीं रहता और इन दुर्दांतो का भय समाज में कानून, संविधान ,पुलिस से ज्यादा रहता है ये जो चाहते हैं सिस्टम में रहकर सब करते हैं और पूरा का पूरा सिस्टम मूकदर्शक बनकर मौनं स्वीकृत लक्ष्ंणम की तरह बैठ कर मुस्कुराता रहता है, संविधान और कानून की दुहाई देने वाले बुद्धिजीवी वर्ग संभ्रांत लोग इन सिस्टम में पले बढ़े माफियाओं का शिकार होते रहते हैं । उनकी आवाज दबा दी जाती है । विकास दुबे के एनकाउंटर पर कोई भी वर्तमान न्यायाधीश एनकाउंटर सही है या गलत है आवाज नहीं उठाया । केवल सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एके पटनायक और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर एस सोढ़ी ने इस एनकाउंटर को सही ठहराया है। पूर्व न्यायाधीश सोढ़ी ने बताया कि अपराध का ग्राफ बढ़ना और एनकाउंटर यह सब संविधान के एक मजबूत स्तंभ न्यायपालिका की निष्क्रियता की देन है । और जिसके साथ घटना घटती है वह जल्द ही न्याय की उम्मीद करता है और अक्सर यह देखा गया है कि एनकाउंटर में अक्सर पब्लिक का सपोर्ट बराबर पुलिसकर्मियों को मिल रहा है चाहे डॉक्टर दिशा के दरिंदों का एनकाउंटर हो या सीओ देवेंद्र मिश्रा के हत्यारे विकास दुबे का एनकाउंटर हो। उसमें पूरा पब्लिक का सपोर्ट रहा है इसका यही कारण है कि देर से न्याय मिलना है । निर्भया गैंग रेप/ हत्या कांड में न्याय मिलने में 7 वर्ष लग गये। देर से न्याय मिलना किसी अन्याय से कम नहीं है । संविधान के एक मजबूत स्तंभ न्यायपालिका की ऐसे ही निष्क्रियता रही तो संविधान में कानून का भय खत्म हो जाएगा। अपराधियों के अंदर से डर खत्म हो जाएगा । साथ ही साथ सिस्टम यह इंतजार न करें कि उसे जब चुनौती मिले तभी वह इन कुख्यातों के खिलाफ एक्शन ले। पूरे सिस्टम को साफ पाक होना होगा । समय रहते यदि पीड़ितों को न्याय नहीं मिला विकास दुबे ऐसे लोगों को तुरंत नहीं दबाया गया तो फूलन देवी, ददुआ, ठोकिया ,घनश्याम केवट, जैसे दर्जनों माफिया समाज के लिए नाग की तरह फन निकाल कर समाज को डसने के लिए पैदा होते रहेंगे । बृजेश सिंह माफिया अतीक अहमद और मुख्तार जैसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों को यदि समय रहते ठिकाने नहीं लगाया गया तो इनको भी विकास दूबे बनने में देर नहीं लगेगी और सिस्टम के लिए कॉल बन जाएंगे । यदि समय रहते न्याय मिला होता तो फूलन देवी ,ठोकिया, ददुआ, वीरप्पन, घनश्याम केवट विकास दूबे जैसे लोग सिस्टम को चुनौती न दे पाते। कार्यपालिका, विधायिका न्यायपालिका आपस में सामंजस्य बना कर एक दूसरे के प्रति सहयोग की भावना से तत्काल समय रहते पीड़ित को न्याय दिलाने का काम करे। जिससे लोगों में कानून और संविधान के प्रति आस्था बनी रहे और लोग आस्थावान रहे।

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