न्याय की आस में मेडिकल के दौरान दम तोड़ दी पीड़िता

दरिंदे को सलाखों के अंदर करने का सपना रह गया अधूरा

 

अंबेडकरनगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद

 

जनपद अंबेडकरनगर -के थाना आलापुर अंतर्गत अमोला बुजुर्ग ढकुलहिया की रहने वाली नाबालिक मनीषा पुत्री हरिश्चंद्र को अपने पर हुए दरिंदगी के लिए दरिंदे को सलाखों के अंदर करने का रेप पीड़िता का सपना अधूरा रह गया । उसने दरिंदे के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज करा दिया लेकिन मेडिकल के दौरान न्याय की जंग लड़ते लड़ते ही उसने जिला अस्पताल में अंतिम सांस ले ली और अंततः उसका सपना न्याय की आस में अधूरा ही रह गया । नाबालिक रेप पीड़िता मनीषा को 18-5-2019 को मनोज कुमार पुत्र मोतीलाल निवासी बढ़ियानी थाना बसखारी ने बहला-फुसलाकर शादी का झांसा देकर दिल्ली लेकर भाग गया था और उसका शारीरिक और मानसिक शोषण करता रहा और अंततः उसने उसे धोखा देकर 8 जुलाई 2020 को बीमारी हालत में शुकुल बाजार जनपद अंबेडकर नगर में छोड़ दिया । तत्पश्चात डिप्रेशन की शिकार बदहाल बीमारी की हालत में वह किसी तरह अपने घर पहुंची । उसकी दशा देखकर उसके घर वाले न्याय की आस में थाना आलापुर पहुंचे । तत्पश्चात थाना का चक्कर लगाते लगाते अंततः मनीषा का मुकदमा थाना आलापुर में 30 जुलाई 2020 को एफआईआर नंबर 0 231 भादवि 1860 धारा 363 ,366, 376, 506 आईपीसी में मुकदमा दर्ज हुआ । उसके दूसरे ही दिन थाना आलापुर की पुलिस टीम उसका मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल अंबेडकर नगर ले गयी। मेडिकल के दौरान ही वह काफी डिप्रेशन में थी । उसका इतना मानसिक और शारीरिक शोषण हो चुका था कि वह बिल्कुल बदहाल हालत में जिला अस्पताल में ही अंतिम सांस ले ली और अपने पर हुई है मानसिक और शारीरिक शोषण दरिंदगी कुकृत्य का परिणाम अंततः अधूरा ही रह गया । वह अपने आंखों के सामने शोषणकर्ता मनोज को जेल नहीं भिजवा पायी और अंततः मेडिकल के दौरान ही न्याय की आस में न्याय की जंग लड़ते हुए आधी अधूरी सपनों के साथ ही वह दुनिया से चल बसी । काश मनीषा अपनी आंखों के सामने ही दरिंदे मनोज को जेल भिजवा लेती तो उसे आत्म संतोष रहता। ताकि मनोज जैसे लोग अन्य किसी नाबालिक लाचार अबला नाबालिग बालिका का शोषण नहीं कर पाते । मनीषा के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल हो गया है । अब मनीषा की लड़ाई उसके परिजनों को लड़ना है । मनीषा के दिवंगत आत्मा की शांति में अलापुर पुलिस कितना सहयोग कर पाती है यह तो समय ही बताएगा लेकिन मनीषा को समय रहते न्याय नहीं मिल पाया यह कहीं न कहीं हमारे सिस्टम में खोट अवश्य दिखाई देता है । 8 जुलाई 2020 से 30 जुलाई 2020 का पर्याप्त समय था कि मनीषा के दरिंदों को जेल के अंदर डाला जा सकता था लेकिन हमारे सिस्टम में कहीं न कहीं दोष की वजह से मनीषा को उसके जिंदा रहते न्याय नहीं मिल पाया ।यह एक गंभीर समस्या है।

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