तेंदुआईकला वन विभाग बना कसाईबाड़ा तीन हिरन एक मयूर का किया तस्करी एडीएम ने मेनका गांधी का हवाला देकर कड़ी कार्रवाई का दिया निर्देश

अंबेडकरनगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद

 

जनपद अंबेडकर नगर- के तहसील आलापुर अंतर्गत तेंदुआ कला वन विभाग वन्यजीवों का कसाईबाड़ा बन चुका है । यहां 3 महीने के अंदर एक बारहसिंघा दो हिरन और एक मोर को ग्रामीणों ने पकड़ कर तेंदूआईकला वन विभाग को सौंपा और उसका इन्होंने तस्करी कर डाला । जिसका कुछ अता पता नहीं चला और ना ही इनके पास कोई लिखा पढ़ी का साक्ष्य है । कम्हरिया ग्राम सभा के ग्राम प्रधान द्वारा तहसीलदार ज्ञानेंद्र यादव की उपस्थिति में तेंदुआ कला वन विभाग को 1 अगस्त को एक हिरन पकड़ कर सौंपा और दूसरे ही दिन उस हिरन का कुछ पता नहीं चला कि वह कहां है । जिसकी मौखिक शिकायत पत्रकार बांकेलाल निषाद द्वारा अपर जिलाधिकारी डॉ पंकज वर्मा और उप जिला अधिकारी धीरेंद्र श्रीवास्तव और तहसीलदार ज्ञानेंद्र यादव से की गयी। अपर जिलाधिकारी द्वारा शिकायत के बाद जब फोन वार्ता के समय रेंजर से हिरन के बारे में में पूछा तो रेंजर सीधे हिरन के बारे में बताया कि उसे जंगल में छोड़ दिया गया है । जब एडीएम ने उस हिरन के जंगल में छोड़ने के लिए लिखा पढ़ी का प्रूफ मांगा तो वह आनाकानी करने लगा ।पूरा तेंदुआआईक्ला वन विभाग उस हिरन को हजम तो कर लिया है और अब कागजी कोरम पूरा कर साक्ष्य को मिटाने में लगा हुआ है । एडीएम ने तत्काल उसे हिरन को पकड़ कर सामने करने का लताड़ लगायी तो पूरा वन विभाग लीपापोती करने में लगा हुआ है ।एडीएम ने रेंजर को मेनका गांधी से शिकायत का हवाला देते हुए तत्काल हिरन को वापस मंगाने के लिए दबाव डाला तो डीएफओ, रेंजर, चौकी प्रभारी समेत पूरा तेंदुआई कला वन विभाग कागजी कोरम पूरा करने में लग गया है। तत्काल पत्रकारों की यही टीम जब तेंदुआईकला वन विभाग पहुंची तो 2 अगस्त को पुनः एक दूसरा हिरन तहसीलदार ज्ञानेंद्र यादव द्वारा कम्हरिया गांव के ही हरिजन बस्ती से लिखा पढ़ी में एक और हिरन को जैसे ही वन विभाग कर्मचारी द्वारा ले जाया गया तो उसी के थोड़ी देर बाद पत्रकारों की टीम पहुंची तो पाया गया कि हिरन की दोनों सींग उखाड़ कर बेच लिया गया है और उसकी सींग पर पट्टी बांध दिया गया है और हिरन की हालत सींग को उखाड़ने से बिल्कुल नाजुक हो गई है । जिसकी तत्काल शिकायत एडीएम से पुनः की गयी। शिकायत की जांच एडीएम व्यक्तिगत संज्ञान लेकर इन वन विभाग कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का आश्वासन दिए हैं । गौरतलब है कि तेंदुआ कला वन विभाग द्वारा तीन माह पहले भी एक बारहसिंघा और एक हिरन और एक मोर की तस्करी कर चुके हैं ।यह वन विभाग वन्यजीव रक्षक नहीं बल्कि वन्यजीव भक्षक बन चुका है । यहां से इन तेंदुआईकला वन विभागों का तस्करी करने वालों से सीधा संपर्क हैं जिसकी तस्करी यहीं से वन विभाग के लोग कर देते हैं । हिरन की सींग लगभग दस पंद्रह लाख की बिकती है और हिरन का मांस 12000 किलो की रेट से बिकता है और वन विभाग द्वारा इन वन्यजीव का तस्करी कर मोटी रकम कमाया जाता है और इनके ऊपर कोई विभागीय कार्यवाही नहीं होती है जिससे इन बनाधिकारियों द्वारा तस्करी करने में कोई डर भय नहीं रहता है। गौरतलब है कि अपर जिलाधिकारी डॉ पंकज वर्मा की पत्नी सुरभि द्वारा गंतव्य चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से एनजीओ चलाया जाता है जिसमें चोटिल वन्यजीवों के दवा, रहने की व्यवस्था ,भोजन आदि की व्यवस्था इस संस्था द्वारा किया जाता है।

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