कागजों में सिमट कर रह गई अत्याधुनिक तकनीकियां ताबड़तोड़ हत्याओं ने छीना चैन बेकाबू हुए अपराध, 2 घंटे में दो लोग मारे गए एक का राजफाश, दूसरा पुलिस की पकड़ से दूर

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। वर्ष 2010 और 11 में दो सीएमओ की गोली मारकर हत्या।
10 मार्च 2014 को वजीरगंज में पेट्रोल पंप संचालक डॉक्टर एमवी त्रिवेदी की लूटपाट के दौरान गोली मारकर हत्या।
10 मार्च 2014 को इंदिरा नगर में जलकल के जेई सत्यनारायण वर्मा की गोली मारकर हत्या।
8 फरवरी 2014 को काकोरी के हाजी कॉलोनी में सपा नेता एवं जमीन कारोबारी हाजी कमाल की गोली मारकर हत्या।
1 दिसंबर 2017 को गोमती नगर में माफिया मुन्ना बजरंगी के करीबी तारिक सरेराह गोलियों से छलनी कर मौत की नींद सुला दिया गया।
27 फरवरी 2015 को हसनगंज में लूटपाट के दौरान 3 लोगों की गोली मारकर हत्या।
5 मार्च 2016 को गोमती नगर थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित मिठाईवाला चौराहे पर इंदिरा नगर निवासी रितेश अवस्थी की गोली मारकर हत्या।
2 फरवरी 2020 को विश्व हिंदू महासभा के अध्यक्ष रणजीत बच्चन की हत्या।
18 अक्टूबर 2019 को हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या।
30 फरवरी 2020 को चौक थाना क्षेत्र के रकाबगंज में दिनदहाड़े सुभाष गुप्ता एवं गोमती नगर में छात्र प्रशांत सिंह की दिनदहाड़े हुई हत्या को लेकर भले ही तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हो, लेकिन कड़वा सच यही है की बीते हुए साल भी अपराधियों के कहर से अछूता नहीं रहा।
सवाल है कि पिछली घटनाओं के दौरान पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू नहीं थी, जबकि वर्तमान में यानी 20 फरवरी को 2 घंटे के भीतर 2 लोगों की हत्या कर हत्यारों ने पुलिस कमिश्नर व्यवस्था को खुली चुनौती दे डाली।
वैसे तो राजधानी लखनऊ में शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इनके बीच आकर बदमाश संगीन वारदातों को अंजाम देकर आसानी से भाग निकले।
खबर में दर्शाई गई घटनाओं पर गौर करें तो इससे पूर्व अपराधी मन भर तो थे अब बेखौफ हो गए हैं।
असलहों से लैस दो बाइक सवार बदमाशों ने चौक व गोमती नगर क्षेत्र में 2 घंटे के भीतर जिस तरह से वारदातों को अंजाम दिया और स्पेशल फोर्स कहे जाने वाली लखनऊ पुलिस लकीर पीटती रह गई और कातिल आराम से भाग निकले।
गौर करें तो राजधानी पुलिस अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने में पहले ही नाकाम साबित हो रही थी, लेकिन पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद से ही अपराधियों ने सलामी पेश करने का सिलसिला शुरू कर दिया है।
गुरुवार को करीब 1:45 पर चौक में पान मसाला व्यवसाई के नौकर सुभाष गुप्ता की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या, जबकि ठीक इसी के 2 घंटे बाद गोमती नगर में बीबीडी के छात्र प्रशांत सिंह की बेरहमी से चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
पुलिस अपने बूते अपराधियों पर लगाम कसने के लिए कई तरह की तकनीकियां अपनाकर बदमाशों पर काबू पाने के लिए जगह-जगह वाहन चेकिंग से लेकर कई रणनीतियां अख्तियार की, लेकिन पुलिस की ढिलाई बानगी 2 फरवरी 2020 से ही शुरू हो गई थी, जब हजरतगंज में मॉर्निंग वॉक के दौरान हिंदू महासभा के नेता रणजीत बच्चन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हालाकी पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा तो किया, लेकिन बदमाशों ने सरेराह हत्या कर खुली चुनौती दे डाली थी।
वही अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने और उनकी धरपकड़ को लेकर जब भी किसी जिम्मेदार पुलिस अफसर से सवाल किया गया तो उनका बस एक ही रटा-रटाया जवाब मिला कि अब किसी भी सूरत में अपराधी नहीं बख्शें जाएंगे।
, दो मोटरसाइकिल, चार सवार, हाथ में असलहा व बीच में नोटों से भरा बैग
कई थाना और पुलिस चौकियां
फिर भी नहीं लगी पुलिस को भनक
दो मोटरसाइकिलों पर हाथों में थामें चार खूनी बदमाश। चौक के रकाबगंज में बाजार खाला के तिलक नगर स्थित सुनील कुमार के नाम से किराना स्टोर एवं सुपारी की दुकान में दिनदहाड़े धावा बोलकर दुकान में मौजूद नौकर सुभाष गुप्ता के ऊपर गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुला दिया और दुकान में रखा नोटों से भरा बैग लेकर फायरिंग करते हुए भाग निकले।
खास बात यह कि कई थाना और कई पुलिस चौकियों के अलावा कई पुलिस पिकेट, जहां पर हर समय भारी पुलिस बल तैनात होने के दावे, लेकिन किसी पुलिसकर्मी ने चेकिंग के दौरान उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की।
यह हाल किसी और जनपद की नहीं बल्कि राजधानी पुलिस का। चौक इलाके के रकाबगंज में गुरुवार को दिनदहाड़े भरी बाजार में सुपारी व्यवसाई की दुकान में धावा बोलकर हत्या करने वाले बदमाशों ने पुलिस की चौकशी की पोल खोल दी।
यूं तो शहर में मोटरसाइकिल पर दो से अधिक लोगों को सवार देख पुलिसकर्मी बोल पर झपट पड़ते हैं, लेकिन नोटों से भरा बैग और हाथ में लिए असलहा लेकर भाग रहे दो मोटरसाइकिल सवार बेखौफ चार बदमाशों ने कई थाना और कई चौकिया पार कर भाग निकले। अति संवेदनशील स्थान की श्रेणी में आने वाले चौक क्षेत्र से बेरोकटोक निकल गए, लेकिन कहीं चेकिंग नहीं हुई। यही नहीं चौराहों पर तैनात ट्रैफिक के दरोगा व सिपाहियों ने भी नहीं रोका। इससे यही साबित हो रहा है कि पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू तो हुई, लेकिन लापरवाह पुलिसकर्मियों की दशा बदलती फिलहाल नजर नहीं आ रही, लिहाजा बेखौफ अपराधियों ने जब चाहा और जहां चाहा वारदातों को अंजाम देकर भाग निकले और लखनऊ पुलिस चेकिंग और धरपकड़ के नाम पर लकीर पीटती रह गई।

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